भारतीय रिजर्व बैंक धीरे-धीरे रुपए को पूंजी खाते में परिवर्तनीय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसके तहत एक तो उसने तय किया है कि अब विदेशी यात्रा पर जाने पर कोई भारतीय नागरिक 2000 डॉलर के बजाय 3000 डॉलर ले सकता है। यह रकम लीबिया, इराक, ईरान, रूसी संघ और सीआईएस देशों के लिए पहले से 5000 ड़ॉलर है जिसे जस का तस रखा गया है। दूसरे, अभी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मेंऔरऔर भी

आज का दिन स्टॉप लॉस के नाम रहा। निफ्टी 5200 अंक के नीचे पहुंचा तो हर तरफ सौदे काटने का सिलसिला चल निकला। चीन ने ब्याज दरें बढ़ा दी थीं और ऑस्ट्रेलिया ने मेटल के दाम। इसलिए दुनिया के बाजारों में पहले से ही थोडी कमजोरी का आलम था। बाजार को तब सदमा-सा लग गया जब ग्रीस ने कह दिया कि उसके लिए 110 अरब यूरो की रकम शायद काफी न पड़े। हमारे लिए इसका क्या मतलबऔरऔर भी

बाजार में अगर 170 अंक का करेक्शन आया तो यह कोई दुनिया से अलहदा बात नहीं थी क्योंकि दुनिया के बाजारों में इससे ज्यादा गिरावट आई है। एक बार फिर देखा गया कि बाजार गिरने के अंदेशे में लोग शॉर्ट सौदे करने लगते हैं, बगैर इसकी परवाह किए कि अभी देश में कितनी बढ़त और खरीद की संभावना है। चीन अपना सीआरआर (बैंकों की जमा का वह हिस्सा जो उन्हें देश के केंद्रीय बैंक के पास नकदऔरऔर भी

आप में और मुझ में क्या अंतर है? मैं जो हो रहा है, उसे देखता हूं, समझता हूं और उसके हिसाब से सलाह देता हूं, जबकि आप सलाह मिलने के बाद भी वही करते हैं जो स्क्रीन बताता है। थोड़े में कहूं तो आपको अपने ही ऊपर भरोसा नहीं है। जब बाजार 300 अंक गिर गया तो आप निचले भावों पर खरीद के बजाय बाजार के दबाव में आ गए और घाटा खाकर भी शेयर बेच डाले।औरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने यूलिप विवाद पर पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी द्वारा दायर याचिका पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार और 14 जीवन बीमा कंपनियों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट में इस मामले पर आज एकदम थोड़ी देर के लिए सुनवाई हुई। यह सुनवाई जस्टिस सरोश होमी कपाडिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही है। बता दें कि कल सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि इस विवादऔरऔर भी

इसमें शायद ही कोई दो राय होगी कि विदेश संस्थागत निवेशक (एफआईआई) हमारे शेयर बाजार के प्रमुख खिलाड़ी बन चुके हैं। इतने बड़े कि बाजार उनके पीछे चलता है। एफआईआई अपना निवेश बहुत सोच-समझ कर गहन रिसर्च के बाद करते हैं। ऐसे में यह जानना बहुत महत्वपूर्ण होता है कि वे किन शेयरों में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं क्योंकि इन ‘महाजनों’ के पथ पर चलकर आम निवेशक भी उनकी विशेषज्ञता का फायदा उठा सकते हैं। हमारीऔरऔर भी

सेटलमेंट से पहले अतिशय डर के कारण कल बाजार में कुछ ज्यादा ही ऊंच-नीच हो गई। समस्या नजरिए के साथ नहीं थी। समस्या थी अप्रैल के साथ-साथ मई के फ्यूचर्स में आपकी देनदारी की। आपके ब्रोकर कल ही आपको जिबह कर चुके थे तो आज बाजार या निफ्टी में और कमजोरी आने का कोई कारण नहीं था। मैं अब भी इसी सोच पर कायम हूं कि निफ्टी 5440 के स्तर पर पहुंचेगा। मैं यह भी मानता हूंऔरऔर भी

बाजार ने आज सुबह से ही धमाचौकड़ी दिखाई। बीएसई सेनसेक्स 310.54 अंक (1.76 फीसदी) और एनएसई निफ्टी 92.90 अंक (1.75 फीसदी) गिरकर बंद हुए। सच कहूं तो बाजार के इस रवैये को देखकर मुझे जरा-सा भी अचंभा नहीं हुआ। मेरा मानना है कि न तो पुर्तगाल और न ही ग्रीस का कोई असर भारतीय बाजार पर पड़नेवाला है। बल्कि यूरोप, चीन, अमेरिका या कोरिया में जो भी गड़बड़ होगी, वह भारत के फायदे में है। मेरे इसऔरऔर भी

पहली जुलाई 2010 के बाद से हर जीवन बीमा कंपनी को यह बताना होगा कि वह अपनी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (यूलिप) में एजेंट को कितना कमीशन दे रही है। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए ने मंगलवार को दोपहर बाद सभी जीवन बीमा कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (सीईओ) को भेजे गए सर्कुलर में कहा है, “कमीशन का उल्लेख उसी इलस्ट्रेशन में करना होगा जिसे ग्राहक को यूलिप बेचते समय एजेंट द्वारा देना अनिवार्य है।” यह सर्कुलर आईआरडीए केऔरऔर भी

कल मेंने निफ्टी में सबसे बड़ा रोलओवर देखा जो साफ-साफ बताता है कि बाजार अब तेजड़ियों के कब्जे में आ गया है। मानसून का पहलू बाजार को कई तरीके से प्रभावित कर रहा है। अच्छे निवेश के आगम से बाजार अब काफी ऊंचाई तक पहुंचने का रुख कर रहा है। हम वित्त वर्ष 2009-10 को पीछे छोड़ रहे हैं और यकीनन यह शानदार विकास का साक्षी रहा है। अब हम नए वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनियों कीऔरऔर भी