जैसी कि उम्मीद थी, मुंबई का सीरियल ब्लास्ट शेयर बाजार पर बेअसर रहा। बाजार खुला जरूर थोड़ा गिरावट व घबराहट के साथ। लेकिन यह मंदड़ियों को घात लगाकर पकड़ने जैसा था क्योंकि परसों निफ्टी 5500 तक गिर गया था और तमाम ट्रेडर व देशी-विदेशी फंड शॉर्ट सौदों में फंस गए थे। यह मजबूत इरादों वाले तेजड़ियों के लिए सुनहरा मौका था और वे मंदड़ियों के साथ जारी शीत-युद्ध के बीच निफ्टी को 5620 के ऊपर ले गए।औरऔर भी

बाजार सुधर कर वापस 5500 के ऊपर के प्रतिरोध स्तर पर आ चुका है। निफ्टी 1.07 फीसदी की बढ़त के साथ 5585.45 पर बंद हुआ है। दरअसल मुद्दा टेक्निकल रैली का नहीं, बल्कि यह तथ्य है कि 22 जून 2011 के बाद कल पहली बार एफआईआई का निवेश ऋणात्मक रहा। उन्होंने कल 969.44 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की है। लेकिन ऐसा इनफोसिस के अपेक्षा से कमतर नतीजों, आईआईपी के कमजोर आंकड़ों व यूरोप में छाई कमजोरीऔरऔर भी

इनफोसिस के खराब नतीजे, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का कम रहना और दुनिया के बाजारों की खराब हालत, खासकर इटली पर घहराता ऋण संकट। इन सब नकारात्मक कारकों ने पूंजी बाजार के लिए आज के दिन को निराशा में डुबो डाला। इसका भरपूर असर निफ्टी पर दिखा। खुला ही करीब 60 अंक गिरकर। दिन के दौरान हालत बिगड़ती गई। नतीजतन बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई। निफ्टी कुल 89.95 अंक या 1.60 फीसदी की गिरावट के साथऔरऔर भी

दुनिया के बाजारों की पस्ती हमारे बाजार में भी पस्ती का सबब बन गई। इटली में बांडों मूल्यों का अचानक गिर जाना और ऑस्ट्रेलिया में कोयला खनन पर टैक्स लगाने जैसी बातों ने माहौल को और बिगाड़ दिया। फिर भी भारतीय बाजार अपेक्षाकृत संभले रहे। मिड-कैप स्टॉक्स में देशी-विदेशी फंडों की खरीद जारी है। एप्टेक, एलएमएल, एसीसी और टाटा मोटर्स के नॉन वोटिंग शेयरों वगैरह को तवज्जो मिल रही है। निफ्टी गिरा जरूर, लेकिन 5600 के नीचेऔरऔर भी

हमने इसी जगह एक बार नहीं, कई बार कहा था कि चाहे कुछ हो जाए, बाजार 5735 तक जाएगा। यह हो गया। महज दो हफ्तों में एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) ने 10,000 करोड़ रुपए की खरीद कर डाली। अहम सवाल है कि आगे क्या होगा? क्या यह क्षणिक आवेग है या बाजार नई छलांग की तैयारी में है? मंदी और तेजी के खेमे की राय स्वाभाविक तौर पर अलग-अलग है। कुछ कहते हैं कि यह महज फुलझड़ीऔरऔर भी

निफ्टी 5740 तक जाने के बाद लगभग 80 अंक नीचे आकर 5660.65 पर गया। इसकी दो वजहें रहीं। एक, मॉरगन स्टैनले ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को डाउनग्रेड कर ओवर-वेट से इक्वल-वेट कर दिया और इसका लक्ष्य 1206 रुपए से घटाकर 956 रुपए कर दिया। नतीजतन, रिलायंस 1.83 फीसदी गिरकर 854.40 रुपए पर आ गया। दूसरी वजह थी – रॉयल्टी व लाभ में हिस्सेदारी वाला नया खनन विधेयक, जिसका संसद में पास हो पाना मुश्किल है। इसमें खनन विधेयकऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति ठंडी पड़ी, दयानिधि मारन का इस्तीफा हुआ और बाजार तेजी से झूम उठा। किसी को भी भान नहीं था कि निफ्टी यूं 5740 के एकदम करीब तक चला जाएगा। मुझे दुनिया को खुद के सही होने का सबूत देने की जरूरत नहीं है। हालांकि जिंदगी जब तक है, तब तक आलोचक भी रहेंगे। बिग बी तक के आलोचक हैं और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के भी। आपको किसी व्यक्ति की उपलब्धिऔरऔर भी

बाजार अगर थोड़ा इधर-उधर हो भी रहा है तो चिंता करने की कोई बात नहीं। यह बाजार के जमने का दौर है। अभी वह जितना ज्यादा खुद को जमाएगा, उतना ही ज्यादा उसके तेजी से उठने के आसार बढ़ जाएंगे। अगर निफ्टी 5500 के नीचे जाता है, तभी मंदी की धारणा पालिए और अगर यह 5780 को पार कर जाता है तो जबरदस्त तेजी के मूड में आ जाइए। आज तो यह महज 6.65 अंक गिरकर 5625.45औरऔर भी

निफ्टी ने भले ही थोड़ी कमजोरी दिखाई हो, लेकिन बी ग्रुप के शेयरों में अच्छी-खासी खरीद हुई है। यह मेरी अपेक्षा के अनुरूप है। निफ्टी जब तक खुद को 5600 से 5700 के बीच जमाता है, तब तक बी ग्रुप के शेयरों का मूल्यांकन सुधरने लगा है। निफ्टी 5659.85 तक जाने के बाद 5632.10 पर बंद हुआ है जो मुझे लगता है कि अच्छा स्तर है। इसके आगे यह कभी भी धमाके के साथ 5715 तक पहुंचऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट का विशेष जांच दल (एसआईटी) अगले महीने अगस्त के तीसरे हफ्ते तक अपनी पहली रिपोर्ट पेश कर देगा। इससे विदेशी बैंकों में रखे भारतीयों के काले धन पर तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। इससे तमाम चिंताओं पर विराम लग जाएगा। और, सुप्रीम कोर्ट की फटकार सहने के बावजूद यूपीए सरकार को यह कहने का मौका मिलेगा कि उसने अपना काम कर दिखाया है। इधर, सरकार के एजेंडे में आर्थिक सुधार फिर से केंद्रऔरऔर भी