जो बात एक्सिस बैंक अपने विज्ञापन में खुद को अलग दिखाने के लिए कर रहा है, उसी बात का फैसला देश भर के बैंकिंग ओम्बड्समैन ने अपने सालाना सम्मेलन में सभी बैंकों के लिए कर लिया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव समेत बैंकों के शीर्ष संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के आला अधिकारियों की मौजूदगी में बैंकिंग ओम्बड्समैन सम्मलेन ने तय किया है कि बैंकों को फ्लोटिंग रेट लोन पर कतई कोई प्री-पेमेंट शुल्क नहींऔरऔर भी

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) को चलाना केंद्र, राज्‍य व संघीय क्षेत्रों की सरकारों की संयुक्‍त जिम्‍मेदारी है। लेकिन खुद केंद्र सरकार का कोई इरादा उचित दर की दुकानें खोलने का नहीं है। यह कहना है कि उपभोक्‍ता मामलात, खाद्य और सार्वजनिक वितरण के राज्‍यमंत्री के वी थॉमस का। उन्होंने सोमवार को राज्‍यसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि टीपीडीएस को उचित दरों की दुकानों के माध्‍यम से चलाया जाता है। उचित दर कीऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में दोहा दौर की बातचीत को विफल नहीं होने दिया जाएगा। यह दावा किया है कि वाणि‍ज्‍य, उद्योग व कपड़ा मंत्री आनन्‍द शर्मा ने। उन्होंने सोमवार को राजधानी दिल्ली में रीजनल ट्रेड पॉलि‍सी कोर्स 2011 के उद्घाटन समारोह में यह बात कही। उन्‍होंने वार्ताओं के इस इस दौर के वि‍कासपरक पक्ष पर जोर देते हुए कहा कि‍ बातचीत की शर्तों को बदला नहीं जा सकता। भारत वि‍कासशील देशों के लोगों के क्षमता नि‍र्माण के लि‍एऔरऔर भी

एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस अब स्वास्थ्य बीमा के धंधे में भी उतर गई है। कंपनी ने हॉस्पिटल कैश स्कीम पेश की है जिसमें पालिसीधारकों को अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान प्रतिदिन एक निश्चित भत्ता मिलेगा। एसबीआई लाइफ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हास्पिटल कैश योजना पालिसीधारकों को अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनकी कुल बचत को निकालने से बचाती है। अस्पताल का बिल कितना भी हो, पर इस योजना के तहतऔरऔर भी

कंस्ट्रक्शन कंपनियों के शेयरों ने भले ही पिछले एक साल में निवेशकों को 55 फीसदी का नुकसान कराया हो, लेकिन अब वे ऐसे मुकाम पर आ गए हैं जहां इनमें किए गए निवेश पर 25 फीसदी या इससे ज्यादा भी रिटर्न मिल सकता है। यह कहा है प्रमुख रेटिंग एजेंसी से संबद्ध क्रिसिल रिसर्च ने अपनी ताजा रिपोर्ट में। सोमवार को जारी इस रिपोर्ट में क्रिसिल रिसर्च ने खास तौर पर पांच कंस्ट्रक्शन कंपनियों का जिक्र कियाऔरऔर भी

भारतीय डाक ने वि‍‍भि‍न्‍न देशों के लि‍ए वी़ज़ा सम्‍बन्‍धी सुवि‍धाएं डाकघरों के जरि‍ए उपलब्‍ध कराने के लि‍ए वीएफएस ग्‍लोबल नाम की वैश्विक फर्म के साथ सहमति‍ पत्र पर हस्‍ताक्षर ‍कि‍ए हैं। यह हस्‍ताक्ष्‍ार इसी हफ्ते मंगलवार, 30 अगस्‍त को डाक वि‍भाग के सचि‍व व अधि‍कारि‍यों और वीएफएस ग्‍लोबल के अधि‍कारि‍यों की मौजूदगी में ‍कि‍या गया। सहमति पत्र के अनुसार उन डाकघरों के जरिए दूरदराज के उन इलाकों में वीज़ा सम्‍बन्‍धी सुवि‍धाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगी जहां ये सुवि‍धाएंऔरऔर भी

यूटीआई म्यूचुअल फंड में चेयरमैन व प्रबंध निदेशक का पद इस साल फरवरी में यू के सिन्हा के पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी का चेयरमैन बन जाने के बाद से ही खाली पड़ा है। इसकी खास वजह है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की निजी सलाहकार ओमिता पॉल इस पद पर अपने भाई जितेश खोसला को बैठाने पर अड़ी हुई हैं, जबकि यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा बनाई गई सर्च कमिटी ने खोसला को अनुपयुक्त ठहरा दियाऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति के दहाई अंक में पहुंचने के बावजूद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने भरोसा जताया है कि खाद्य उत्पादों की महंगाई दर अच्छे मानसून और बेहतर पैदावार के कारण कम हो जाएगी। परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन ने गुरुवार को कहा, “उम्मीद है कि मुद्रास्फीति आने वाले सप्ताहों में घटेगी क्योंकि मानसून अच्छा रहा है। हम मानसून के अंत के करीब पहुंच चुके है और संकेत मिल रहे हैं कि इस साल पैदावार अच्छी रहेगी।”औरऔर भी

सोमवार को रिजर्व बैंक ने नए बैंकों को लाइसेंस देने के नियमों का खाका पेश किया। मंगलवार को सहारा इंडिया समूह की पैरा-बैंकिंग कंपनी सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने घोषणा कर दी कि उसके पास जून 2011 तक जमाकर्ताओं के कुल 73,000 करोड़ रुपए जमा है, जिसे वह इसी साल दिसंबर वापस कर देगी और उसके बाद उसके ऊपर एक पैसे की भी देनदारी नहीं बचेगी, जबकि रिजर्व बैंक ने उसे इसके लिए 30 जून 2015औरऔर भी

रिजर्व बैंक एक तरफ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की सेहत को लेकर परेशान है, वहीं हमारे बैंक इस क्षेत्र को जमकर कर्ज रहे हैं। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश के वाणिज्यिक बैंकों ने जुलाई 2011 में एनबीएफसी को पिछली जुलाई की तुलना में 55.6 फीसदी ज्यादा कर्ज दिया है, जबकि पिछली बार इस क्षेत्र को दिए गए कर्ज में वृद्धि केवल 10.9 फीसदी थी। एनबीएफसी को दिए गए बैंक ऋण की मात्रा इस समयऔरऔर भी