सरकार ने आज बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल की कीमतों से नियंत्रण पूरी तरह हटा लिया। अब पेट्रोल पर सरकार की तरफ से कोई सब्सिडी नहीं दी जाएगी और इसका मूल्य बाजार के हिसाब से तय होगा। लेकिन डीजल पर अभी सरकार थोड़ा नियंत्रण बरकरार रखेगी, जबकि रसोई गैस और केरोसिन के मूल्य अब भी पूरी तरह उसके नियंत्रण में रहेंगे। मंत्रियों के साधिकार समूह (एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स – ईजीओएम) ने शुक्रवार को अपनी बैठक मेंऔरऔर भी

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नेच्रुरल रिसोर्सेज (आरएनआरएल) ने बड़े भाई मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के साथ संशोधित गैस सप्लाई मास्टर एग्रीमेंट पर आज, 25 जून 2010 को दस्तखत कर लिए। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों के इसकी आधिकारिक सूचना देते हुए बताया है कि अब वह भारत सरकार से प्राकृतिक गैस के आवंटन की प्रक्रिया तेज करने को कहेगी। असल में आरएनआरएल ने इसके लिए बाकायदा अनुरोध पेट्रोलियम मंत्रालय के पास भेज भी दियाऔरऔर भी

अपनी मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाने की चीन की महत्वाकांक्षा रंग लाती नजर आ रही है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने गुरुवार को जारी की गई अपनी रिपोर्ट मे कहा है कि युआन बहुत तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल की जानेवाली मुद्रा बन सकती है और दुनिया के तमाम देश अपना विदेशी मुद्रा भंडार अमेरिकी डॉलर की जगह युआन (रेनमिंबी) में रख सकते हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अर्थ इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर किए गए संयुक्तऔरऔर भी

पिरामल हेल्थकेयर के जेनरिक दवा व्यवसाय को अमेरिकी कंपनी एब्बॉट द्वारा खरीदे जाने के लगभग एक महीने बाद ही भारतीय दवा उद्योग में एक और बड़ा सौदा होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज अपना फॉर्मूलेशन बिजनेस बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी फाइजर को 250 करोड़ डॉलर (लगभग 11,560 करोड़ रुपए) में बेचने जा रही है। इसके तहत कंपनी के चेयरमैन व प्रवर्तक के. अंजी रेड्डी की पूरी की पूरी 25.77 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी फाइजर कोऔरऔर भी

इस समय 1,26,700 भारतीयों के पास दस लाख डॉलर (4.62 करोड़ रुपए) से ज्यादा की संपत्ति है। लगभग 120 करोड़ की आबादी के हिसाब से गिनें तो हर 9471 भारतीयों में से केवल एक व्यक्ति इतना धनवान हैं, जबकि स्विटजरलैंड में हर 1000 में से 35 लोगों के पास इतनी संपदा है। मेरिल लिंच की वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट के अनुसार भारत में इस स्तर के एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स) की संख्या 2005 में 83000, 2006 में 1,00,015औरऔर भी

हमारे देश में कुछ चीजें इतनी महीन तरीके से हो जाती हैं कि किसी को आभास ही नहीं होता कि इसमें कुछ गड़बड़ भी है। जैसे, बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने एक अधिसूचना जारी कर तय कर दिया कि कंपनियों द्वारा जारी किए जानेवाले एक साल तक के अपरिवर्तनीय डिबेंचरों (एनसीडी) में न्यूनतम निवेश 5 लाख रुपए का होगा। इसके बाद यह निवेश एक-एक लाख करके बढ़ाया जा सकता है। हालांकि यह नियम एनसीडी के प्राइवेटऔरऔर भी

साल 2009 में एशिया में करोड़पतियों की संख्या बढ़कर 30 लाख हो गई है और यह आज तक के इतिहास में पहली बार यूरोप की बराबरी में आई है। यही नहीं, एशिया के करोड़पतियों की कुल संपत्ति 9.7 लाख करोड़ डॉलर रही है जबकि यूरोप के करोड़पतियों की कुल संपत्ति 9.5 लाख करोड़ डॉलर ही रही है। यह निष्कर्ष है मेरिल लिंच-कैपगेमिनी की ताजा वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट का। रिपोर्ट ने चुटकी लेते हुए कहा है कि जबऔरऔर भी

पिछले साल अगस्त से ही म्यूचुअल फंड उद्योग को दुरुस्त करने और उसमें रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश में लगे सेबी चेयरमैन सी बी भावे ने लगता है हथियार डाल दिए हैं। बुधवार को मुंबई में उद्योग संगठन सीआईआई (कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री) के म्यूचुअल फंड सम्मेलन में उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग को खुद ही एक आम नीति का प्रस्ताव पेश करना चाहिए कि इस उद्योग को कैसे संचालित किया जाए। सम्मेलन मेंऔरऔर भी

भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को देश के सभी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों को भेजे गए सर्कुलर में बताया है कि 1 दिसंबर 2010 से चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) के तहत क्लियर होनेवाले किसी भी चेक में तारीख के अलावा कहीं भी कोई कट्टमकुट्टा नहीं चलेगा। अभी तक लोग पानेवाले के नाम से लेकर राशि तक बदलते रहे हैं। बस, जहां भी काटते थे, वहां अपना दस्तखत कर देते थे। लेकिन अब तारीख के अलावा कहीं भीऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी 1 जुलाई 2010 से ऐसा नियम लागू करने जा रही थी, जिससे म्यूचुअल फंडों में कॉरपोरेट क्षेत्र का छोटी अवधि का भारी निवेश दूर भाग सकता था। लेकिन सेबी ने एक नया सर्कुलर जारी कर इस पर अमल की तारीख 1 अगस्त 2010 कर दी है। वैसे, साथ ही कहा कि जो म्यूचुअल फंड इसकी तैयारी कर चुके हों, वे इसे पहले भी लागू कर सकते हैं। असल में सेबी ने 2औरऔर भी