ईमानदार अर्थव्यवस्था में लोग पूरा दम लगाकर कठिन कठोर मेहनत करते हैं क्योंकि उन्हें मेहनत का फल पाने का यकीन होता है। वे अपनी तरफ से कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। जोखिम उठाते हैं। मौकों को हाथ से नहीं जाने देते। अंततः कुछ अपने उत्पाद और सेवा के दम पर कामयाब होते हैं तो कुछ किस्मत के दम पर। लेकिन कामयाबी और नाकामी में एक पैटर्न होता है। एक तरह की सच्चाई होती है। वहीं, जब अर्थव्यवस्था परऔरऔर भी

कोई अपने फायदे के लिए नोट छापे तो गुनाह है। लेकिन केंद्रीय बैंक नोट पर नोट छापता जाए और दावा करे कि वह ऐसा देश और देश की अर्थव्यवस्था के कल्याण के लिए कर रहा है तो उसे सही मान लिया जाता है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन बेन बरनान्के यही कर रहे हैं, किए जा रहे हैं। तीन महीने पहले 13 सितंबर को उन्होंने क्यूई-3 या तीसरी क्वांटिटेटिव ईजिंग की घोषणा की थीऔरऔर भी

यह सच है कि इंसान और समाज, दोनों ही लगातार पूर्णता की तरफ बढ़ते हैं। लेकिन जिस तरह कोई भी इंसान पूर्ण नहीं होता, उसी तरह सामाजिक व्यवस्थाएं भी पूर्ण नहीं होतीं। लोकतंत्र भी पूर्ण नहीं है। मगर अभी तक उससे बेहतर कोई दूसरी व्यवस्था भी नहीं है। यह भी सर्वमान्य सच है कि लोकतंत्र और बाजार में अभिन्न रिश्ता है। लोकतंत्र की तरह बाजार का पूर्ण होना भी महज परिकल्पना है, हकीकत नहीं। लेकिन बाजार सेऔरऔर भी

मित्रों! न तो आपके इंतज़ार की घड़ियां खत्म हुई हैं और न ही मेरी। पढ़ाने से पहले पढ़ने में लगा हूं। एक बात तो साफ है कि निवेश के माध्यमों का जोखिम तो मै मिटा नहीं सकता। वो भविष्य में छलांग लगाने का मसला है, अनिश्चितता से जूझने का मामला है। वहां तो जोखिम हर हाल में रहेगा, कोई ‘भगवान’ तक उसे मेट नहीं सकता। लेकिन अपने स्तर पर मैं पढ़-लिखकर पक्का कर लेना चाहता हूं किऔरऔर भी

मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पिछले तीन साल में 180% बढ़ चुकी हैं। दूसरी तरफ, ताजा खबरों के मुताबिक यहां 80,000 फ्लैट अनबिके पड़े हैं। सप्लाई भी ज्यादा और भाव भी ज्यादा!! ऐसा इसलिए क्योंकि अनबिके फ्लैट 4000-7000 वर्गफुट के हैं जिनकी औसत कीमत 1.4 करोड़ रुपए है। इतने बड़े फ्लैट तो भयंकर अमीर ही ले सकते हैं। अगर यही फ्लैट औसतन 5000 वर्गफुट के बजाय 1000 वर्गफुट के होते तो आज 4 लाख फ्लैट ऐसे होतेऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने काफी हद तक सहारा समूह का पक्ष स्वीकार कर लिया है, जबकि उसके खिलाफ लड़ रहे पूंजी बाजार नियामक, सेबी और निवेशकों के समूह की शिकायत है कि अदालत ने उनका पक्ष सुना ही नहीं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश अलतमस कबीर और जस्टिस एस एस निज्जर व जे चेलामेश्वर की बेंच ने फैसला सुनाया कि सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन,औरऔर भी

हम आमतौर पर जिन कारों की सवारी करते हैं, उनमें लगनेवाले पेट्रोल या डीजल का महज 5% हमें ढोने में लगता है। 80% ईंधन तो खुद कार को ढोने में लग जाता है। बाकी 15% हिस्सा ईंधन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया के दौरान बरबाद चला जाता है। विकसित देशों में कार जरूरत की सवारी है, जबकि अपने यहां जरूरत से ज्यादा शान और दिखावे की। यह दिखावा हमारी ही नहीं, देश की जेब पर भीऔरऔर भी

कभी सन्नामी अंतरराष्ट्रीय सलाहकार फर्म मैकेंजी के सरगना और गोल्डमैन सैक्श से लेकर प्रॉक्टर एंड गैम्बल व अमेरिकन एयरलाइंस जैसी बड़ी कंपनियों के निदेशक रह चुके अनिवासी भारतीय रजत गुप्ता की इज्जत का फालूदा बन चुका है। बुधवार को देर शाम अमेरिका की एक जिला अदालत ने उन्हें ‘धोखेबाज और बेईमान’ करार देते हुए दो साल की कैद और 50 लाख डॉलर जुर्माने की सज़ा सुना दी। फैसले के मुताबिक रजत गुप्ता की कैद 8 जनवरी 2013औरऔर भी

दुनिया में कृषियोग्य जमीन के मामले में भारत अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है। अमेरिका के पास 1627.51 लाख हेक्टेयर खेतिहर जमीन है। चीन का कुल क्षेत्रफल हमारे तीन गुने से ज्यादा है। लेकिन हमारे पास खेती लायक जमीन 1579.23 लाख हेक्टेयर है, जबकि चीन के पास 1099.99 लाख हेक्टेयर। फिर भी चीन का अनाज उत्पादन हमसे कई गुना ज्यादा है। कारण, चीन की तुलना में हमारे यहां गेहूं की उत्पादकता 55%, धान की 51%, तिलहनऔरऔर भी

देश के इक्विटी बाजार में उतरनेवाला नया स्टॉक एक्सचेंज, एमसीएक्स एसएक्स पूरी तैयारी कर चुका है और बहुत मुमकिन है कि 13 नवंबर को दीवाली के मंगल अवसर पर या इससे पहले ही एक्सचेंज में ट्रेडिंग शुरू कर दे। एक्सचेंज के उप-चेयरमैन जिग्नेश शाह ने सोमवार को मुंबई में एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया, “नौ साल पहले 18 नवंबर को हमने अपने कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स की शुरुआत की थी। हमारी कोशिश एमसीएक्स एसएक्स की शुरुआत भी नवंबरऔरऔर भी