सरकार नए सीजन में चीनी निर्यात की अनुमति पर दिवाली के बाद निर्णय ले सकती है। कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि सरकार ने पिछले सीजन में खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के तहत तीन समान खेपों में 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। निर्यात की तीसरी खेप अभी तक उठाई नहीं गई है। अगर इसे उठा लिया जाता है तब सरकार और निर्यात की अनुमति देगी। गन्ने की पेराई के बारे में उन्होंनेऔरऔर भी

इस समय केंद्रीय कृषि मंत्रालय देश भर में खेती-किसानी से जुड़ी 19 तरह की 50 से ज्यादा स्कीमें चलाता है। लेकिन अगले साल 2012 से शुरू हो रही 12वीं पंचवर्षीय योजना में इनकी संख्या घटाकर मात्र आठ कर दी जाएगी। ये वैसी स्कीमें हैं जिन्हें केंद्र सरकार प्रायोजित करती है। बाकी स्कीमों का जिम्मा राज्य सरकारों पर छोड़ दिया जाएगा। वे चाहें तो चलाएं और चाहें तो बंद कर दें। यह स्पष्ट किया है कृषि सचिव पीऔरऔर भी

महाराष्ट्र में प्याज निर्यात एक राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा था। खासकर नासिक के किसान निर्यात पर प्रतिबंध का विरोध कर रहे थे। इससे डर कर केंद्र सरकार ने 11 दिनों के भीतर ही प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला वापस ले लिया है। बता दें कि रिटेल बाजार में प्याज की कीमत 25 रुपए किलोग्राम पर पहुंचने के बाद सरकार ने इसी महीने 9 सितंबर को प्याज निर्यात पर रोक लगा दी थी। मंगलवारऔरऔर भी

कृषि मंत्रालय के अनुसार इस बार धान और तिलहन के बोवाई रकबे में काफी वृद्धि हुई है। इससे लगता है कि चावल व खाद्य तेलों की सप्लाई ज्यादा रहेगी जिससे इनके दाम नीचे आ सकते हैं। कृषि मंत्रालय ने बताया है कि राज्‍यों से प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार 16 सितंबर ‍तक 376.77 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में धान की बोवाई हुई है। यह पिछले साल के मुकाबले 33.55 लाख हेक्‍टेयर अधि‍क है। पश्‍चि‍म बंगाल, बि‍हार, झारखंड, उत्‍तर प्रदेश,औरऔर भी

सभी लोग कंपनियों के लाभ मार्जिन के कम या ज्यादा होने की बात करते हैं। लेकिन कोई इस बात पर गौर नहीं करता कि देश के अन्नदाता किसानों का लाभ मार्जिन कितना घटता जा रहा है। एक तो वैसे ही 90 फीसदी किसान गुजारे लायक खेती करके जिंदा है, ऊपर से मार्जिन में सुराख ने गरीबी में आटे को और गीला कर दिया है। एक खबर के अनुसार, धान की फसल पर किसानों ने पिछले साल प्रतिऔरऔर भी

देश में कुल 2547 वन ग्राम हैं। किसी भी वन ग्राम को राजस्‍व ग्राम में नहीं बदला गया है। असल में छह राज्यों ने वन ग्रामों को राजस्व गावों में बदलने के लिए 73 प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पास भेजे हैं। इसके लिए करीब 2.71 लाख हेक्टेयर वन भूमि को अनारक्षित करना पड़ेगा। केंद्र ने अब तक 511 वन ग्रामों को राजस्‍व ग्रामों में बदलने के लिए 40,986.81 हेक्‍टयर वन भूमि को अनारक्षित करने की सैद्धांतिकऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने नेफेड और एनसीसीएफ (नेशनल कंज्यूमर्स को-ऑपरेटिव फेडरेशन) से कहा है कि वे प्‍याज की कीमतों को नि‍यंत्रि‍त करने के लि‍ए फौरन बाजार में हस्‍तक्षेप करें। खाद्य राज्यमंत्री के वी थॉमस का निर्देश है कि दोनों एजेंसि‍यों के बि‍क्री केंद्र 20 रुपए कि‍लो की दर से प्याज बेचेंगे। राज्‍य सरकारों से भी आग्रह कि‍या गया है कि‍ वे अपनी एजेंसि‍यों के माध्‍यम से बाजार में इसी तरह के कदम उठाएं। लेकिन मंत्री महोदय को शायदऔरऔर भी

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) को चलाना केंद्र, राज्‍य व संघीय क्षेत्रों की सरकारों की संयुक्‍त जिम्‍मेदारी है। लेकिन खुद केंद्र सरकार का कोई इरादा उचित दर की दुकानें खोलने का नहीं है। यह कहना है कि उपभोक्‍ता मामलात, खाद्य और सार्वजनिक वितरण के राज्‍यमंत्री के वी थॉमस का। उन्होंने सोमवार को राज्‍यसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि टीपीडीएस को उचित दरों की दुकानों के माध्‍यम से चलाया जाता है। उचित दर कीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति के दहाई अंक में पहुंचने के बावजूद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने भरोसा जताया है कि खाद्य उत्पादों की महंगाई दर अच्छे मानसून और बेहतर पैदावार के कारण कम हो जाएगी। परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन ने गुरुवार को कहा, “उम्मीद है कि मुद्रास्फीति आने वाले सप्ताहों में घटेगी क्योंकि मानसून अच्छा रहा है। हम मानसून के अंत के करीब पहुंच चुके है और संकेत मिल रहे हैं कि इस साल पैदावार अच्छी रहेगी।”औरऔर भी

केंद्र सरकार ने अनाजों के भंडारण में निजी क्षेत्र को खींचने के लिए ऐसी योजना चला रखी है जिसके तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) उनके गोदामों को दस साल तक किराए पर लेने की गारंटी दे रहा है। उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री के वी थॉमस ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने सोमवार को बताया कि उनके मंत्रालय ने ढके हुए भंडारण गोदामों के नि‍र्माण व भंडारण में कवर व पि‍लिंथ (सीएपी)औरऔर भी