सत्ता से फासला
सही समझ के लिए सत्ता से दो हाथ की दूरी जरूरी है। सत्ता आपकी आंखों पर परदा डाल देती है। ऐसा मतिअंध बना देती है कि आपको बस अपना ही अपना दिखता है, बदलता सच नहीं दिखता।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
सही समझ के लिए सत्ता से दो हाथ की दूरी जरूरी है। सत्ता आपकी आंखों पर परदा डाल देती है। ऐसा मतिअंध बना देती है कि आपको बस अपना ही अपना दिखता है, बदलता सच नहीं दिखता।और भीऔर भी
नैतिकता की दुहाई कमजोर लोग देते हैं। धर्म, समाज व राजनीति के ठेकेदारों के लिए यह लोगों को भरमाने का एक जरिया है जिसका नाम जपते हुए वे खुद जघन्य से जघन्य काम किए जाते हैं।और भीऔर भी
मानव समाज कोई गेहूं का बोरा नहीं है जो चार दाने उठाकर सारे माल की गुणवत्ता तय कर दी जाए। यहां तो अंतिम आदमी भी इतना अनोखा हो सकता है कि सारे सर्वेक्षण का नतीजा ही पलट जाए।और भीऔर भी
अक्सर जिन्हें हम जानते हैं, उन्हें ही पूरी दुनिया समझ बैठते हैं। उनकी नकारात्मक प्रतिक्रिया से टूट जाते हैं। नहीं जानते कि जो लहर हमारे अंदर उठी है उसका स्रोत तो हमारे दायरे के बाहर का सागर है।और भीऔर भी
भूत, वर्तमान और भविष्य की अनुभूति के बीच सही संतुलन जरूरी है। अतीत मिट जाए तो हम शब्दहीन, वर्तमान खो जाए तो अवसादग्रस्त और भविष्य न दिखे तो निर्जीव मशीन बन जाते हैं।और भीऔर भी
हम सभी ब्रह्म हैं। एक से अनेक होने, एक को अनेक करने की कोशिश करते हैं। नहीं कर पाते तो सिर धुनते हैं। नहीं भान कि दूसरों को मान दिए बिना, दूसरों का साथ लिए बिना अनेक नहीं हो सकते।और भीऔर भी
देश से भ्रष्टाचार मिटाने के दो सूत्र – एक, राजनीतिक दलों की फंडिंग की पारदर्शी व्यवस्था हो। दो, चुनावों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली अपनाई जाए ताकि व्यक्ति के बजाय लोग पार्टी को तरजीह दें।और भीऔर भी
हर कोई अपनी ज़िंदगी जीने को स्वतंत्र है। लेकिन जैसे ही आप देश या समाज की सामूहिक जिम्मेदारी संभालते हैं, आपकी निजता खत्म हो जाती है, अपने निजत्व को निर्वासित करना पड़ता है।और भीऔर भी
किताबों में अच्छी बातें पढ़ते हैं। ज्ञान की अच्छी बातें सुनते हैं। लेकिन चंद दिनों में वे उड़ जाती हैं। इसलिए क्योंकि दिमाग तो काम की जरूरी बातें ही सजोकर रखता है। इसलिए पहले जरूरत बढ़ाओ बंधुवर!और भीऔर भी
चमत्कार से इनकार नहीं। लॉटरी से भी कोई इनकार नहीं। लेकिन अक्सर चमत्कार का इंतजार करते-करते पूरी जिंदगी बीत जाती है। इस बीच चमत्कार और लॉटरी का धंधा करनेवाले जरूर मालामाल हो जाते हैं।और भीऔर भी
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