आस्था का फायदा
जब हमें लगता है कि हम तो निमित्त मात्र हैं और हमारे पीछे कोई बड़ी शक्ति काम कर रही है तो हम मां की गोद में पड़े बच्चे की तरह बेधड़क किलकारियां मारने लगते हैं। आस्था का यही फायदा है।और भीऔर भी
त्रिकाल दृष्टि
अपनी इच्छाओं को आरोपित करने के बजाय हमें उन्हें यथार्थ के हिसाब से सजाना चाहिए। यथार्थ सतह से उभरा अंकुर ही नहीं, सतह के नीचे पड़ा बीज भी होता है। इसी त्रिकाल दृष्टि से पूरी होती हैं इच्छाएं।और भीऔर भी
चौंको तो सही!
हम सही सवाल पूछना शुरू कर दें तो समझिए कि सच तक पहुंचने की हमारी आधी यात्रा पूरी हो गई। लेकिन हम तो ‘होता है, चलता है’ की सोच के ऐसे आदी हो गए हैं कि चौंकते ही नहीं, सवाल ही नहीं पूछते।और भीऔर भी
प्रिय की देखभाल
जो चीजें प्रिय हों, उनकी उपेक्षा कतई नहीं की जानी चाहिए। उनकी देखरेख नहीं टाली जा सकती। नहीं तो गर्द-गुबार और समय के झंझावातों में वे ऐसी गुम हो जाती हैं कि लाख खोजने पर भी नहीं मिलतीं।और भीऔर भी
ज्ञान का मूल्य
भग्न पृष्ठ कटि ग्रीवा, बद्ध दृष्टिः अधोमुखी। कष्टेन लिखितम् शास्त्रम्, यत्नेन परिपालय। बड़ी मेहनत व कष्ट से हासिल होता है ज्ञान। इसका मूल्य समझना चाहिए। बड़े यत्न से संभालना चाहिए।और भीऔर भी
काश ऐसा हो जाए!
काहिल और कामचोरों का कभी कुछ नहीं हो सकता। बाकी हर किसी को अगर मन का काम मिल जाए और उससे उसका घर-परिवार भी चल जाए तो वह काम में ऐसा रमेगा कि कभी छुट्टी ही नहीं मांगेगा।और भीऔर भी
कुछ भी सीधा नहीं
वजह चाहे जो भी हो, इस सृष्टि में सभी चीजें गोल हैं, सीधी नहीं। लेकिन हमारी नजरें सीधी देखती हैं। इसलिए हमारा क्षितिज हमेशा बंधा रहता है। पूरा सच देखने के लिए सतह से ऊपर उठना जरूरी है।और भीऔर भी
ज़ीरो से हीरो
गुमान रहता है कि हम ये कर डालेंगे, वो कर डालेंगे। हालात से टकराकर हकीकत सामने आती है तो हम जीरो बन जाते हैं। लेकिन यही जीरो जरूरी जज्बे का साथ पाकर आपको फिर से हीरो बना सकता है।और भीऔर भी
माया की काया
हम जैसे-जैसे बढ़ते हैं, सामाजिक होते जाते हैं, वैसे ही वैसे हमारे पूर्वाग्रह बढ़ते जाते हैं। हार्मोंस के आग्रह इन पूर्वाग्रहों के साथ मिलकर मायाजाल बना देते हैं। सही शिक्षा का काम इसी मायाजाल को काटना है।और भीऔर भी
