हर चीज की काट
इस जहां में सिर्फ एक चीज है जिस पर इंसान का वश नहीं है। वो है समय और उसी से संचालित होता जीवन-मरण का चक्र। बाकी किसी भी चीज की काट नियमों को समझकर निकाली जा सकती है।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
इस जहां में सिर्फ एक चीज है जिस पर इंसान का वश नहीं है। वो है समय और उसी से संचालित होता जीवन-मरण का चक्र। बाकी किसी भी चीज की काट नियमों को समझकर निकाली जा सकती है।और भीऔर भी
हम किस आशय/भाव से कोई बात कहते हैं, इसका कोई महत्व नहीं। महत्व इसका है कि उससे संदेश क्या गया, संप्रेषित क्या हुआ। सो, बोलने से पहले सामनेवाले की स्थिति पर गौर कर लेना चाहिए।और भीऔर भी
कहीं एक तारा टूटकर डूब गया। देखा आपने? कहीं एक कोंपल पेड़ की अकाल मौत से कुम्हला कर सूख गई। देखा आपने? आपके अंदर का इंसान निर्वासित हो गया। अजीब हैं! कुछ भी क्यों नहीं देखते आप?और भीऔर भी
लोग आपको बारंबार कौआ साबित करने की कोशिश करेंगे। लेकिन आप हंस हो तो उसकी उज्ज्वल ठसक के साथ रहो। किसी का कहा दिल पर लोगे तो जमाने की ठगी का शिकार बन जाओगे और पछताओगे।और भीऔर भी
लोकतंत्र में फैसले लेना बड़ा आसान है क्योंकि बहुमत की राय आसानी से जानी जा सकती है। फैसलों में मुश्किल तब आती है कि कोई सरकार बहुमत के नाम पर अल्पमत का हित सब पर थोपना चाहती है।और भीऔर भी
विचार उस टॉर्च की तरह हैं जो हर अंधेरे मोड़ पर आपको दस गज दूर तक का ही रास्ता दिखाते हैं। इसलिए सफर में निरंतर आगे बढ़ने के लिए हर मोड़ पर विचारों को नई दिशा, नई रौशनी देनी जरूरी है।और भीऔर भी
कितना अजीब है कि जो भावनाओं से हीन हैं, वे हम सबकी भावनाओं से खेलते हैं। नेता से अभिनेता और कॉपीराइटर तक। पर जो भावनाओं से भरे हैं, उनमें शहादत का भाव तो लबालब है, सीखने का सब्र नहीं।और भीऔर भी
अनुभूति पहले आती है। शब्द बाद में आते है। शब्दों के खो जाने के बाद भी अनुभूति बची रहती है क्योंकि वही मूल है, शब्द तो छाया हैं। दोनों में द्वंद्व है समाज और व्यक्ति का, इतिहास और वर्तमान का।और भीऔर भी
चीजें वही, लोग भी वही रहते हैं। लेकिन जान-पहचान होते ही उनका पूरा स्वरूप बदल जाता है। पूर्वाग्रह छंट जाते हैं। असली छवि सामने आ जाती है। इसलिए दूर के नहीं, पास के रिश्ते बनाने जरूरी हैं।और भीऔर भी
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