भगवान और धर्म की शुरुआत समाज में सुख-शांति के साधन के रूप में हुई थी। सदियों तक सब कुछ राजी-खुशी चलता रहा। समस्या तब से शुरू हुई जब इन्हें साधन के बजाय साध्य बना दिया गया।और भीऔर भी

प्यार नहीं कर सकते तो प्यार का मोल तो समझो। उसकी कद्र तो करना सीखो। दे नहीं सकते तो देनेवाले का सम्मान तो करो। नहीं तो किसी दिन अपनों को तरस जाओगे और कोई पुछत्तर तक नहीं होगा।और भीऔर भी

बीज अगर फलियों की खोल तोड़कर बाहर न निकलें तो सृजन का सिलसिला ही रुक जाए। इसी तरह मानव समाज को आगे बढ़ाने के लिए कुछ लोगों को सुरक्षा का कवच तोड़कर बाहर निकलना ही पड़ता है।और भीऔर भी

वो सभा, सभा नहीं जिसमें गुरुजन न हों। वे गुरुजन, गुरुजन नहीं जिनकी वाणी में सदाचार न हो। वह सदाचार, सदाचार नहीं जिसमें सत्य न हो। वो सत्य, सत्य नहीं जो किसी को कपट के लिए उकसाता हो।  और भीऔर भी

हमें हर चीज का मूल्य दूसरों की नज़र से आंकना चाहिए। कोई चीज हो सकता है कि हमें मूल्यवान न लगे, लेकिन दूसरों के लिए वह बहुमूल्य हो सकती है। या, हमें मूल्यवान लगे और दूसरों को फालतू।और भीऔर भी

घर-परिवार से लेकर काम-धंधे तक स्वार्थों की दुनिया फैली है। इनमें कुछ गिने-चुने लोग ही होते हैं जो आपकी परवाह करते हैं। ऐसे हमदर्द दोस्त बड़े नसीब वालों को ही मिलते हैं। इसलिए इनकी कद्र जरूरी है।और भीऔर भी

निष्काम भाव से कर्म दो ही तरह के लोग कर सकते हैं। एक, जिनका वर्तमान व भविष्य दोनों सुरक्षित हो और दो, जिनका वर्तमान व भविष्य इतना असुरक्षित हो कि उनके पास कोई चारा ही न बचा हो।और भीऔर भी

सफल होते ही लोग आपके दीवाने हो जाते हैं। पर, कोई यह नहीं देखता कि किन-किन हालात व संघर्षों से होड़ लेते हुए आप वहां पहुंचे हैं। कितना अजीब है कि शीर्ष पर पहुंचते ही आप निपट अकेले हो जाते हो।और भीऔर भी

जब वर्तमान बेकार और भविष्य अनिश्चित हो, तभी कोई अतीतजीवी बनता है। वरना, किसी को इतनी फुरसत कहां कि गुजरे कल को महिमामंडित करता फिरे! अतीतजीविता मर्ज का लक्षण है, निदान नहीं।और भीऔर भी

बेधड़क निडर होकर जीनेवाले लोग ही महान बनते हैं। अगर हम देश में निडर होकर जीने का माहौल नहीं दे सकते तो भारत महान कभी नहीं बन सकता है और यहां बौनों की ही फौज पैदा होती रहेगी।और भीऔर भी