जिजीविषा की परख
जीवन और मृत्यु की शक्तियां बराबर हमें अपनी ओर खींचती रहती हैं। उम्र के एक पड़ाव के बाद मृत्यु हावी हो जाती है। तभी परख होती है हमारी जिजीविषा की कि मृत्यु के जबड़े से हम कितनी ज़िंदगी खींचकर बाहर निकाल लेते हैं।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
जीवन और मृत्यु की शक्तियां बराबर हमें अपनी ओर खींचती रहती हैं। उम्र के एक पड़ाव के बाद मृत्यु हावी हो जाती है। तभी परख होती है हमारी जिजीविषा की कि मृत्यु के जबड़े से हम कितनी ज़िंदगी खींचकर बाहर निकाल लेते हैं।और भीऔर भी
न जाने कितने जिरहबख्तर बांधे फिरते हैं हम। कभी भगवान, कभी परिवार, कभी परंपरा तो कभी नौकरी का कवच कुंडल हमारी हिफाजत करता रहता है। बहादुर वो है जो इस सारी सुरक्षा को तोड़कर सीधे सच का सामना करता है।और भीऔर भी
भोर से पहले आंख बंदकर सोचते रहते हैं तो हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा नज़र आता है। आंखें खोलकर देखते हैं तो इस बीच हर तरफ उजाला आ चुका होता है। लेकिन प्रकृति का यह नियम क्या समाज पर भी लागू होता है?और भीऔर भी
किसी ने कुछ कह दिया। हम बिदक गए। यूं ही प्रतिक्रिया में जीते-जीते सारी जिंदगी कट जाती है। कभी ठहरकर यह तो सोचो कि तुम्हें खुद क्या पाना है, तुम्हारी मंज़िल क्या है? फिर ये सारा फालतू उछलना-कूदना थम जाएगा।और भीऔर भी
हम अक्सर अतीत के प्रति मोह, वर्तमान के प्रति खीझ और भविष्य के प्रति डर से भरे रहते हैं। कल, आज और कल को साधना जरूरी है। लेकिन उसके लिए हमें निर्मोही, निरपेक्ष और निडर बनना होगा।और भीऔर भी
खेमे पकड़ लेना सबसे आसान है। लेकिन खेमों से बाहर निकलकर सत्य का अनुसंधान बहुत कठिन है। खेमों में आस्था चलती है। आप बहुत कुछ मानकर चलते हैं। लेकिन यहां सब कुछ कसौटी पर कसा जाता है।और भीऔर भी
अर्थव्यवस्था और सरकार दोनों का मूल मकसद अवाम की सेवा करना है। लेकिन भ्रष्ट होते ही वे उल्टा काम करने लगती है और लोगों को निचोड़कर उनका धन व सत्ता कुछ हाथों में केंद्रित करने लग जाती हैं।और भीऔर भी
हमारा मन कहीं और भागता है तो विचारों के जरिए हम उसे पकड़ते हैं, संतुलित करते हैं। इन विचारों का निरपेक्ष सत्य होना कतई जरूरी नहीं। इनकी तात्कालिक भूमिका है मन के भटकाव को रोकना।और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom