जिम्मा आपका
लोगों को आपसे नहीं, आपको लोगों से जुड़ना है। जोड़ और प्रेम में अहंकार नहीं चलता। आप होश में हो, लोग नशे में हैं तो उनको खींचकर सही मुकाम, सही राह पर लाने का जिम्मा तो आपका ही हुआ न!और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
लोगों को आपसे नहीं, आपको लोगों से जुड़ना है। जोड़ और प्रेम में अहंकार नहीं चलता। आप होश में हो, लोग नशे में हैं तो उनको खींचकर सही मुकाम, सही राह पर लाने का जिम्मा तो आपका ही हुआ न!और भीऔर भी
जानने की शुरुआत चौंकने से होती है। जिस दिन हम चौंकना बंद कर देते हैं, उसी दिन से नया जानने की सिलसिला रुक जाता है। ज्ञान की धारा अवरुद्ध हो जाती है। इसलिए चौंकना कभी मत छोड़िए।और भीऔर भी
अंदर का निर्वात या रीतापन जितना बड़ा होता है, भगवान और सनसनीखेज़ चमकदार चीजों की माया हम पर उतनी ही हावी हो जाती है। बेहतर यही है कि रीतेपन को माया से नहीं, सच्चे ज्ञान से भरा जाए।और भीऔर भी
भावुक किस्म के जीव हैं हम। सजीव क्या, निर्जीव चीजों तक से मोह पाल लेते हैं। साल-छह महीने भी साथ रह लिए तो छोड़ते वक्त गला भर आता है। पर दुनियादारी के लिए यह भावुकता भली नहीं।और भीऔर भी
जो लोग कहीं किसी कोने में सिमटकर रहना चाहते हैं, उनके लिए यह दुनिया हमेशा छोटी बनी रहेगी। लेकिन जो लोग खुलकर जीना चाहते हैं, उनके लिए हर दिन चलें, तब भी एक ज़िंदगी छोटी पड़ जाती है।और भीऔर भी
जननी, जन्मभूमि और मातृभाषा के चयन की छूट हमें नहीं। जो मिला, उसे सम्मान से स्वीकार करना ही उचित है। पर सरकार व सत्ता तंत्र को राष्ट्र मान उसके गलत कृत्य को स्वीकार करना अनुचित है।और भीऔर भी
जो लोग देखने से ही मना कर देते हैं, उनके फैसले कैसे सही हो सकते हैं? तथ्यों से सत्य और सत्य से सूत्र निकलते हैं। पहला चरण है तथ्यों की तहकीकात। जो इससे भागते हैं, उनके सूत्र सरासर बकवास हैं।और भीऔर भी
कौन है जो आंखों के होते हुए भी देख नहीं पाता? वो कौन है जो कानों के रहते हुए भी सुन नहीं पाता? वो कौन है जो जुबान रहते हुए भी बोल नहीं पाता? अंदर के कृष्ण से पूछो कि अर्जुन ऐसा अशक्त क्यों है?और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom