नेता और नौकरशाह
सामाजिक मामलों में गांधारी बना पढ़ा-लिखा शातिर इंसान कामयाब नौकरशाह बनता है। वहीं सामाजिक मामलों में पांचाली बना कढ़ा हुआ शातिर इंसान राजनेता बनता है। यही दोनों की पेशागत श्रेष्ठता है।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
सामाजिक मामलों में गांधारी बना पढ़ा-लिखा शातिर इंसान कामयाब नौकरशाह बनता है। वहीं सामाजिक मामलों में पांचाली बना कढ़ा हुआ शातिर इंसान राजनेता बनता है। यही दोनों की पेशागत श्रेष्ठता है।और भीऔर भी
मनोरंजन का सच्चा साधन तो हमारे सपने हैं जिनका फलक बढ़ाते रहना जरूरी है। इसलिए जमकर जानो ताकि यथार्थ के हर पहलू को छू सको और जमकर सोओ ताकि सपने हर पहलू को नया विन्यास दे सकें।और भीऔर भी
दुर्भाग्य कहीं आसमान से नहीं टपकता। वह तो हमारे ही कर्मों का नतीजा होता है। हां, वह अपने साथ इतनी चासनी लेकर ज़रूर आता है कि कुछ सोचे-समझे बिना हम उसके स्वागत के लिए लपक पड़ते हैं।और भीऔर भी
हम धारणा पहले बना लेते हैं। फिर तथ्यों को उसमें फिट कर देते हैं। यह सोच अवैज्ञानिक है। हमें अपनी सोच को नए सिरे से ढालना होगा ताकि मान्यताओं के बजाय हम तथ्यों को तरजीह देना सीख सकें।और भीऔर भी
अपनी तसल्ली के लिए मन में यही भाव बैठा लेना श्रेयस्कर है कि हम जो भी काम करते हैं, मूलतः अपने लिए करते हैं, दूसरों के लिए नहीं। दूसरा तो बस बहाना है। वह न होता तो हम निठल्ले पड़े रहते।और भीऔर भी
पत्थर में न तो इच्छा होती है और न द्वेष। उसे न सुख होता है, न दुख। न ही पत्थर अपना रूप बनाए रखना चाहता है, जबकि ये अनुभूतियां ही प्राणियों की पहचान और उनके जीवन का मूल तत्व हैं।और भीऔर भी
जहां कुछ करने के लिए कुछ न करनेवालों की मंजूरी लेनी पड़े, जहां बिचौलियों की मौज और रिश्वत का बोलबोला हो, जहां कानून भी उन्हें ही बचाता हो, वैसे तंत्र का नाश आज नहीं तो कल अवश्यसंभावी है।और भीऔर भी
जनता के धन की लूट भ्रष्टाचार है और जनता के धन से सरकार की तिजोरी भरती है जिसे जन-प्रतिनिधि ही लूटते हैं। ऐसे में ये प्रतिनिधि कैसे जनता के सच्चे प्रतिनिधि और ये लूटतंत्र लोकतंत्र कैसे हो सकता है?और भीऔर भी
किसी से मिलते ही हम समानता के बिंदु पहले तलाशने शुरू कर देते हैं। लेकिन समानता से शुरू हुए रिश्ते अंततः तनावग्रस्त हो जाते हैं। वहीं, अगर हम असमानता से शुरू करें तो रिश्ते दीर्घजीवी बनते हैं।और भीऔर भी
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