मुंबई के मलाड में रहनेवाले मेरे मित्र अहिंद्र वर्मा पिछले दिनों अपने ऑफिस के काम से सिंगापुर दौरे पर गए हुए थे तो उनके घर में सेंधमारी हो गई। अज्ञात सेंधमार उनके घर से काफी जेवरात, बेशकीमती कलाकृतियां, सजावटी सामान, कपड़े व घड़ियां लेकर चंपत हो गए। इस सेंधमारी में बड़ी तरतीब से सजाया हुआ घर भी तकरीबन तहस-नहस हो गया। इस मामले में वर्मा को लगभग सात लाख रुपए का नुकसान हुआ। वे बताते हैं किऔरऔर भी

क्या आपने अपने जेवरातों का बीमा करवाया है? यदि आपका जवाब न में है तो आप देर मत कीजिए। आपके कीमती जेवरात हों या आपका पर्स उनको बीमा सुरक्षा देना बहुत जरूरी है। आज के समय में चोरी व लूट के साथ पॉकेटमारी की घटनाएं इस कदर बढ़ गई हैं कि हमेशा चिंता बनी रहती है कि अपनी मूल्यवान वस्तुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए? इसका सबसे सरल तरीका है कि जेवरातों का बीमा करवा लीजिए। यहऔरऔर भी

मुंबई की एक बीपीओ कंपनी में कार्यरत 52 वर्षीय अंकुश सावंत के पास हालांकि अपने नियोक्ता की ग्रुप मेडीक्लेम पॉलिसी है। पिछले दिनों उन्हें लगा कि हेल्थकेयर के बढ़ती खर्च की वजह से आज के जमाने में परिवार के हर सदस्य के पास पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी होना चाहिए। लेकिन बीमा एजेंट ने जब उन्हें प्रीमियम बताया तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। सावंत कहते हैं कि अगर यह हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी मैं 30औरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने 27 अगस्त 2007 से ही डीमैट खातों के लिए पैन (परमानेंट एकाउंट नंबर) को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन अब भी बहुत सारे निवेशक हैं जिन्होंने अपने डीमैट खातों के डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीपी) के पास पैन नंबर की पुष्टि नहीं कराई है। इसके लिए उन्हें पैन कार्ड की फोटोकॉपी वगैरह देनी थी। अभी तक पैन वेरिफिकेशन न करानेवाले निवेशक अपने खाते से कुछ डेबिट नहीं सकते थे। लेकिन सेबी ने अबऔरऔर भी

यह सच है कि हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और होते हैं। लेकिन यह बात मुझे अभी-अभी पता चली है कि हमारे पूंजी बाजार में भी ऊपर-ऊपर जो दिखाया जाता है, हकीकत उससे काफी जुदा होती है। जैसे, यह कि बहुत सारी कंपनियों के आईपीओ फंडेड होते हैं। इस अर्थ में ही नहीं कि उनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशन खरीदार (क्यूआईबी), एंकर इनवेस्टर और एचएनआई पहले से ही इश्यू के मर्चेंट बैंकर से बातचीत के बादऔरऔर भी

अगर आप नौकरीपेशा है और टीडीएस के जरिए आपका टैक्स कट चुका है तो टैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2010 का आपके लिए कोई मतलब नहीं है। आप आराम से अपना टैक्स रिटर्न 31 मार्च 2011 तक भर सकते हैं। यहां तक कि आप 31 मार्च 2012 तक भी टैक्स रिटर्न भरें तो आप पर कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी। इसके बाद जरूर लगेगी। लेकिन 31 जुलाई के बाद रिटर्न भरने पर आप हाउसिंग लोनऔरऔर भी

इस साल के बजट में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने घोषित किया था कि आयकर एक्ट की धारा 80 सी, 80 सीसीसी और 80 सीसीडी के तहत मिलनेवाली कुल एक लाख रुपए की कर-मुक्त आय के ऊपर 20,000 रुपए और बचाने की सुविधा इंफ्रास्ट्रक्चर बांडों में किए गए निवेश पर मिलेगी। अब ये बांड निर्धारित कर दिए गए हैं। वित्त मंत्रालय ने घोषित किया है कि आईएफसीआई, एलआईसी और आईडीएफसी के अलावा उन गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों कीऔरऔर भी

गंजे को कंघी का क्या जरूरत और बच्चों को जीवन बीमा की क्या जरूरत? लेकिन जीवन बीमा कंपनियां अभी तक यूलिप के जरिए ऐसा ही करती रही हैं। खरीदनेवाला शुरू में एजेंट के झांसे में रहता है कि कैसे कुछ साल तक दिया गया 25-30 हजार रुपए का सालाना प्रीमियम बच्चे के बड़े होने पर एक-डेढ़ करोड़ में बदल जाएगा। बाद में होश आता है कि अरे, यह तो हमारे बच्चे का जीवन नहीं, मृत्यु बीमा बेचकरऔरऔर भी

पिछले कुछ महीनों से उठे गुबार के बाद थोड़े-से भी जानकार निवेशकों में यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पोडक्ट) को लेकर इतनी हिकारत पैदा हो गई है कि वे इसमें पैसा लगाना सरासर बेवकूफी समझते हैं। आम धारणा यही है कि बीमा लेना हो तो टर्म इंश्योरेस लेना चाहिए और निवेश का लाभ लेना हो तो सीधे म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना चाहिए। इन दोनों के घालमेल यूलिप में पैसा लगाने का मतलब सिर्फ एजेंट की जेब भरनाऔरऔर भी

जानकारों का कहना है कि सोने के भाव में अभी जिस तरह बढ़ने का रुझान चल रहा है, उसमें निवेशकों को इसकी कीमत में सुधार आने तक निवेश का इंतजार करना चाहिए। वैसे, पिछले दो महीनों के दौरान ज्यादातर गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) के एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) में 15 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। बता दें कि गोल्ड ईटीएफ ओपन इंडेड म्यूचुअल फंड स्कीमें हैं जिसमें निवेशकों के सोने में लगाया जाता है।औरऔर भी