दुनिया भर में साल 2009 को ऐसा साल माना जाएगा जब लाखों आम लोगों को अपने घर-बार और नौकरी-चाकरी से हाथ धोना पड़ा। लेकिन हाल ही जारी फोर्ब्स पत्रिका की लिस्ट के मुताबिक दुनिया में खरबपतियों की संख्या साल भर पहले की 793 से करीब डेढ़ गुनी होकर 1011 हो गई है। इसमें भी उन हेज फंडों की सेहत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है जिनकी वजह से वैश्विक वित्तीय संकट ने आग पकड़ी थी। फोर्ब्सऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शनिवार 6 मार्च को अपनी बोर्ड बैठक में शेयर बाजार से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है। वह यह कि उसने स्टॉक एक्सचेंजों को शेयरों के डेरिवेटिव सौदों में अभी की तरह कैश या नकद सेटलमेंट के साथ ही शेयरों की लेन-देन या फिजिकल सेटलमेंट की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसे कब तक लागू किया जाएगा, इसका फैसला स्टॉक एक्सचेंजों से बातचीत के बाद तयऔरऔर भी

उदय प्रकाश की एक कहानी है राम सजीवन की प्रेमकथा। इसमें खांटी गांव के रहनेवाले किसान परिवार के राम सजीवन जब दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ने जाते हैं तो वहां कोई लड़की कानों में सोने का बड़ा-सा झुमका या गले में लॉकेट पहनकर चलती थी तो वे बोलते थे कि देखो, वह इतना बोरा गेहूं, सरसों या धान पहनकर चल रही है। ऐसा ही कुछ। मैंने वो कहानी पढ़ी नहीं है। लेकिन इतना जानताऔरऔर भी

हमारे गांव में एक गजा-धर पंडित (जीडीपी) थे। थे इसलिए कि अब नहीं हैं। गांव के उत्तर में बांस के घने झुरमुट के पीछे बना उनका कच्चा घर अब ढहकर डीह बन चुका है। तीन में से दो बेटे गांव छोड़कर मुंबई में बस गए हैं और एक कोलकाता में। वहीं पंडिताई करते हैं। शुरू में जजमान अपने ही इलाके के प्रवासी थे। लेकिन धीरे-धीरे जजमानी काफी बढ़ गई। गजाधर पंडित बाभन थे या महाबाभन, नहीं पता।औरऔर भी