देश में अगले साल अप्रैल से नवंबर तक छठी आर्थिक गणना कराई जाएगी। आखिरी बार आर्थिक गणना वर्ष 2005 में की गई थी। छठी आर्थिक गणना से सरकार को विभिन सामाजिक आर्थिक विकास योजनाओं को शुरू करने के प्रभावों का जायजा लेने में मदद मिलेगी। छठी आर्थिक गणना के लिए राज्‍यों और केन्‍द्रशासित प्रदशों के आर्थिक व सांख्यिकी महानिदेशालय के सचिवों और निदेशकों के अखिल भारतीय सम्‍मेलन की शुरुआत मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हुई। इसका उद्घाटनऔरऔर भी

खाद्य सुरक्षा विधेयक बुधवार को संसद बहस के पेश किया जाएगा। इस विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रविवार को मंजूरी दे दी थी। इसके आने के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र व उससे जुड़े अर्थशास्त्रियों ने फिर हल्ला उठा दिया कि सरकार पर इससे सब्सिडी का बोझ 21,000 करोड़ रुपए बढ़ जाएगा और खजाने का संतुलन गड़बड़ा जाएगा। ऐसा ही हल्ला कई साल पहले राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून लाते वक्त भी उठा था। लेकिन हकीकत यह है कि खजानेऔरऔर भी

बीएसई में कल कुल 2950 प्रपत्रों या स्क्रिप्स में ट्रेडिंग हुई। इनमें से चार ने अब तक का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर हासिल कर लिया। ये हैं – तिलक फाइनेंस, कृष्णा वेंचर्स, इंडियन ब्राइट और सुलभ इंजीनियर्स। ये चारों ही टी ग्रुप की कंपनियां हैं जिनमें कोई सट्टेबाजी नहीं चलती और 100 फीसदी डिलीवरी लेना जरूरी है। दूसरी तरफ कल 175 कंपनियों के शेयर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। इससे एक इशारा तो यहऔरऔर भी

घर-परिवार से लेकर काम-धंधे तक स्वार्थों की दुनिया फैली है। इनमें कुछ गिने-चुने लोग ही होते हैं जो आपकी परवाह करते हैं। ऐसे हमदर्द दोस्त बड़े नसीब वालों को ही मिलते हैं। इसलिए इनकी कद्र जरूरी है।और भीऔर भी

इस साल खाद्य सब्सिडी का बजट लक्ष्य 60,572 करोड़ रुपए है, जबकि 1 अप्रैल से 15 दिसंबर 2011 तक 45,125 करोड़ रुपए यानी इसका 74.5% हिस्सा बांटा जा चुका है। इससे पहले वित्त वर्ष 2009-10 में खाद्य सब्सिडी 58,242.45 करोड़ और 2010-11 में 62,929.56 करोड़ रही थी। यह सब्सिडी एफसीआई और राज्य सरकारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीबों के बीच सस्ता खाद्यान्न बेचने के लिए दी जाती है। नए खाद्य सुरक्षा विधेयक से इस सब्सिडीऔरऔर भी

रिजर्व बैंक के मुताबिक भारतीय बैंकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपए के ऋण जोखिम से घिरे क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। इन क्षेत्रों में टेलिकॉम, बिजली, रीयल एस्टेट, एविएशन व मेटल उद्योग शामिल हैं। ये सभी उद्योग किसी न किसी वजह से दबाव में चल रहे हैं। जैसे, मेटल सेक्टर अंतरराष्ट्रीय कीमतों व मांग के गिरने से परेशान है तो बिजली क्षेत्र बढ़ती लागत व ऊंची ब्याज दरों का बोझ झेल रहा है। धंधे पर दबावऔरऔर भी

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वन्यजीव संरक्षण को बढावा देने की योजना के तहत गुजरात सरकार ने लुप्तप्राय पक्षी सोनचिरैया को फलने-फूलने का माकूल माहौल देने के लिए कच्छ जिले में 1500 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। सोनचिरैया को अंग्रेजी में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) कहा जाता है। राज्य सरकार ने ‘कच्छ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सैंक्चुअरी’ के नजदीक कच्छ के नालिया तालुका में दो वर्ग किलोमीटर में फैली भूमि आवंटित की है। इस लुप्तप्राय पक्षी के प्रजनन के लिए इस जगह कोऔरऔर भी

लोकपाल विधेयक पर सरकार अण्णा हज़ारे के आक्रामक तेवर के आगे नरम पड़ती दिख रही है। एक तरफ मुंबई के बांद्रा कुरला कॉम्प्लेक्स के एमएमआरडीए मैदान में हज़ारे को 27 दिसंबर से 15 दिनों तक अनशन करने की सरकारी अनुमति मिल गई है। वहीं, इसकी नौबत न ही आए, इसके लिए कल, मंगलवार दोपहर दो बजे विधेयक को अंतिम रूप देने के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है। कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के मुताबिक विधेयक काऔरऔर भी

यूपीए सरकार उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बुनकरों के पैकेज घोषित कर रही है। लेकिन उसे यह नहीं पता कि किस राज्य में हरकरघा उत्पादों की बिक्री व निर्यात कितना है। सरकार के पास इसका कोई राज्यवार ब्यौरा नहीं है। यह बात सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कपड़ा राज्‍य मंत्री पनबाका लक्ष्‍मी ने स्वीकार की। बता दें कि रविवार को ही कैबिनेट ने बुनकरों के लिए 2350 करोड़ रुपए काऔरऔर भी