दुनिया की सन्नामी रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी) ने कहा है कि भारत का आम बजट उसकी रेटिंग (BBB-/Stable/A-3) पर थोड़ा नकारात्मक असर डाल सकता है। उसका कहना है कि वित्त मंत्री ने खजाने की व्यवस्था के संबंधित तमाम सुधार घोषित किए हैं, लेकिन माल व सेवा कर (जीएसटी), प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) औप सब्सिडी सीधे लक्ष्य तक पहुंचाने जैसे अहम सुधारों के अमल के वक्त को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। साथ ही भारतऔरऔर भी

कहते हैं कि दोस्त आईने जैसा होना चाहिए जो आपके हंसने पर हंसे और आपके रोने पर रोए। लेकिन ऐसे दोस्त से क्या फायदा जो आपका भ्रम नहीं मिटा सकता? आपको एक से अनेक नहीं बना सकता?और भीऔर भी

यह बजट किसके लिए है? आम के लिए, खास के लिए या बाजार के लिए! अगर प्रतिक्रियाओं के लिहाज से देखा जाए तो इनमें से किसी के लिए भी नहीं। आम आदमी परेशान हैं कि उसे बमुश्किल से मुद्रास्फीति की मार के बराबर कर रियायत मिली है। खास लोगों को कहना था कि वित्त मंत्री को राजकोषीय मजबूती के लिए जो ठोस उपाय करने थे, वैसा कोई भी साहसिक कदम उन्होंने नहीं उठाया है। उन्होंने दस मेंऔरऔर भी

अभी तक अगर किसी हाउसिंग सोसायटी में प्रॉपर्टी टैक्स वगैरह निकालकर प्रति सदस्य महीने का मेन्टेनेंस शुल्क 3000 रुपए तक है तो इस पर कोई सर्विस टैक्स नहीं लगता। नए वित्त वर्ष 2012-13 में सर्विस टैक्स की छूट की यह सीमा प्रति सदस्य 5000 रुपए कर दी गई है। हालांकि वित्त मंत्री ने अपने भाषण में इसे फ्लैट में रहनेवाले सदस्य के मासिक शुल्क में टैक्स छूट की बात कही है और स्पष्ट नहीं किया है किऔरऔर भी

हर खासो-आम यही तलाशने में लगा है कि उसे बजट 2012-13 से क्या मिला। कंपनियों और धंधे वालों की बात अपनी जगह है। लेकिन अगर हम नौकरीपेशा लोगों की बात करें तो आयकर के नए प्रावधानों का सबसे ज्यादा फायदा साल भर में आठ से दस लाख कमानेवालों को होगा। बजट में आयकर छूट की सीमा 1.80 लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए सालाना कर दी गई है। हालांकि संसदीय समिति ने इसे तीन लाख करनेऔरऔर भी

राजीव गांधी के नाम पर सीधे शेयरों में 50,000 रुपए लगाओ। तीन साल तक उसे हाथ न लगाओ और इस निवेश का 50 फीसदी हिस्सा आयकर में रियायत पाओ। जी हां, वित्त मंत्री ने नए साल के बजट में रिटेल निवेशकों को शेयर बाजार में खींचने के लिए पहली बार राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम शुरू की है। इसका पूरा ब्योरा तो बाद में अलग से जारी किया जाएगा। लेकिन वित्त मंत्री के प्रस्ताव के मुताबिक, जिनऔरऔर भी

चुनाव न होते तो बजट का रहस्य 16 दिन पहले ही खुल जाता। चलिए, इससे वित्त मंत्री और उनके अमले को अपने प्रस्तावों को ठोंक-बजाकर दुरुस्त करने के लिए ज्यादा वक्त मिल गया। लेकिन हम तो उन्हीं के भरोसे हैं तो हमें क्या वक्त मिलना और क्या न मिलना! इतना तय है कि बजट की एक-एक लाइन किसी न किसी रूप में कंपनियों के धंधे पर असर डालती है और इसका सीधा असर उनके शेयरों पर पड़ेगा।औरऔर भी

नीतियां बनानेवाले भी हमारे-आप जैसे इंसान होते हैं। वे भी हमारी तरह संपूर्ण को न देख पाने की गलती कर सकते हैं। उनके फैसले सबको प्रभावित करते हैं। इसलिए उन पर सभी को निगाह रखना जरूरी है।और भीऔर भी

औषधि मूल्‍य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) 1995 के अनुसार अनु‍सूचित दवाओं का मूल्य राष्‍ट्रीय औषधि मूल्‍य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) खुदरा दुकानदारों के 16 फीसदी लाभ को ध्‍यान में रखते हुए तय करता है। इनमें 74 बल्‍क दवाएं शामिल हैं। कोई भी व्‍यक्ति किसी भी अनुसूचित दवा को तय मूल्य से ज्यादा दाम पर नहीं बेच सकता। डीपीसीओ 1995 के अंतर्गत ब्रांड और बिना ब्रांड वाली दवाओं में कोई अंतर नहीं किया जाता। जो गैर-अनुसूचित दवाएं इस आदेश सेऔरऔर भी