ट्रेडिंग के लिए हम ऐसे स्टॉक्स चुनते हैं जो खरीद-फरोख्त के असर से घट-बढ़ सकते हैं, जबकि निवेश में हम ऐसी कंपनियों को चुनते हैं जिनका धंधा पुख्ता आधार पर खड़ा हो और जिसमें बढ़ने की भरपूर गुंजाइश हो। दिक्कत है कि हममें से 99 फीसदी लोग ट्रेडिंग की मानसिकता रखते हैं। छाया के पीछे भागते हैं और माया गंवाते रहते हैं। यह रुख न तो देश की अर्थव्यवस्था और न ही हमारे दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य केऔरऔर भी

तर्क की हद तक वहीं खत्म हो जाती है, जहां तक चीजें रैखिक होती हैं। धरती को जब तक चिपटा माना जाता रहा, तब तक तर्क ही सर्वोपरि थे। लेकिन धरती के गोल होते ही तर्क का सारा पटरा हो गया।और भीऔर भी

रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का इस्तीफा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। इसके बाद तय हुआ कि रेल बजट 2012-13 पर जो भी चर्चा होगी, उसका जवाब वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देंगे। सोमवार से लोकसभा में रेल बजट पर चर्चा शुरू हो चुकी है। ये पहला मौका है जब अलग तरह के राजनीतिक हालात पैदा हो गए हैं। लिहाजा सरकार के सामने बड़ी चुनौती आ गई कि रेल बजट परऔरऔर भी

सरकार अगले साल जनवरी-फरवरी तक 2जी सेवा समेत स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर सकती है। यह बात वित्त सचिव आर एस गुजराल ने सोमवार को उद्योग संगठन सीआईआई द्वारा आयोजित एक समारोह में कही। गुजराल ने कहा ‘‘नीलामी कार्यक्रम के संबंध में दूरसंचार विभाग ने वित्त मंत्रालय को जो संकेत दिए हैं, उसके अनुसार यह प्रक्रिया अगले साल जनवरी-फरवरी तक पूरी हो जाएगी।’’ सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2012 को अपने निर्णय में दूरसंचार मंत्री एऔरऔर भी

भारत हथियारों के मामले में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है। यह दुनिया में हो रही हथियारों की बिक्री का 10 फीसदी खरीदता है। स्वीडन के सुरक्षा मामलों की एक संस्था ने कहा है कि पिछले पांच सालों (2007 से 2011 के बीच) में भारत के हथियारों की खरीद में 38 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2012-13 के लिए भारत का रक्षा खर्च 17औरऔर भी

यूपीए सरकार भले ही ढिंढोरा पीटती रहे कि उसने कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रखी है, लेकिन बजट 2012-13 के दस्तावेजों से साफ है कि वह केंद्रीय आयोजना व्यय का महज 2.71 फीसदी हिस्सा कृषि व संबंधित गतिविधियों पर खर्च करती है। नए वित्त वर्ष 2012-13 में कुल केंद्रीय आयोजना व्यय 6,51,509 करोड़ रुपए का है। इसमें से 17,692.37 करोड़ रुपए ही कृषि व संबंद्ध क्रियाकलापों के लिए रखे गए हैं। इन क्रियाकलापों में फसलों से लेकरऔरऔर भी

हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि सेल मार्केटिंग की एक बाजीगरी है जिसके चलिए उपभोक्ताओं की मानसिकता को भुनाया जाता है। शेयर बाजार में भी हर साल इस तरह की ‘क्लियरेंस’ सेल तीन बार लगती है, जिसमें बेचनेवाले अपना माल निकालते हैं। पहली बजट के आसपास, दूसरी दीवाली पर और तीसरी नई साल की शुरुआत पर। सेल में लोगबाग टूटकर भाग लेते हैं। जब उन्हें कोई रोक नहीं सकता तो आपको कोईऔरऔर भी

सभ्य से सभ्य समाज में भी इंसान के अंदर एक जानवर बैठा रहता है। जो रिवाज इस जानवर को हवा देते हैं, उन्हें बेरहमी से खत्म कर देने की जरूरत है। परंपरा के नाम उन्हें चलाते रहना हैवानियत है।और भीऔर भी

फकीर बोला, “मुझमें, तुझमें कोई फर्क नहीं। बस, समय और फासले का फेर है। मैं सच तक पहुंच चुका हूं, जबकि तू अभी रास्ते में हैं। तू भी यहां पहुंचकर वही बोलेगा। फिर बहस क्यों? जिरह का क्या तुक!”और भीऔर भी

वित्त मंत्री ने अपने हिसाब से शेयर बाजार को लुभाने की बहुत कोशिश की। एसटीटी (सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) घटा दिया। ग्राहकों की तंगी से त्रस्त बाजार में नए रिटेल निवेशकों को खींचकर लाने के लिए एकदम तरोताजा, राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम शुरू कर दी। आईपीओ लाने की प्रक्रिया आसान कर दी। इसकी लागत घटा दी। कंपनियों को छोटे शहरों के और ज्यादा निवेशकों तक पहुंचने में मदद की। दस करोड़ रुपए से ज्यादा के आईपीओ कोऔरऔर भी