कैसी नैतिकता!
कानून ही लंबे समय में व्यापक सामाजिक स्वीकृति पाने के बाद नैतिकता बन जाते हैं। फिर भी नैतिकता सर्वकालिक नहीं होती। किसी नैतिक मानदंड के सही होने का एक ही पैमाना है कि वह व्यापक समाज के वर्तमान व भावी हित में है या नहीं।और भीऔर भी
कानून ही लंबे समय में व्यापक सामाजिक स्वीकृति पाने के बाद नैतिकता बन जाते हैं। फिर भी नैतिकता सर्वकालिक नहीं होती। किसी नैतिक मानदंड के सही होने का एक ही पैमाना है कि वह व्यापक समाज के वर्तमान व भावी हित में है या नहीं।और भीऔर भी
स्वार्थ पर टिकी इस दुनिया में भी लोग परमार्थी हो सकते हैं। लेकिन कोई हमारा इतना हितैषी क्यों बन रहा है? दूसरे की सलाह पर गौर करते हुए हमें खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए। अपने स्वार्थ की साफ समझ इसी तरह से बनती है।और भीऔर भी
केंद्र सरकार ने देश में गरीबी के आकलन और गरीबों की पहचान के नए तौर-तरीके सुझाने के लिए एक अलग विशेषज्ञ दल बनाने का फैसला लिया है। यह दल प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख डॉ. सी रंगराजन की अध्यक्षता में बनाया जाएगा। इसमें कई जानेमाने अर्थशास्त्री शामिल है। इनमें प्रमुख हैं: इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. महेन्द्र देव, दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स के पूर्व प्राध्यापक डॉ. के सुन्दरम, सीएमआईई के प्रमुख डॉ.औरऔर भी
दिल्ली डाक सर्किल ने गुरू पुष्य नक्षत्र के मौके पर सोने के सिक्कों की खरीद पर विशेष छूट देने की घोषणा की है। गुरू पुष्य नक्षत्र शनिवार, 26 मई 2012 को पड़ रहा है। सोने के सिक्के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के 31 डाकघरों में उपलब्ध हैं। ग्राहक निकटतम डाकघरों में पहुंच कर इनकी खरीद पर 6.5 फीसदी की छूट पा सकते हैं। यह पेशकश 26 मई 2012 तक मान्य है। दिल्ली में चिन्हित कुछ डाकघरों मेंऔरऔर भी
किसी इंसान के बुद्धिमान या धनवान होने का मतलब यह नहीं कि उसने अपनी पशु-वृत्तियों पर काबू पा लिया है; बल्कि सत्तावान होते ही उसकी पशु-वृत्तियां और प्रबल हो जाया करती हैं। केवल ज्ञानवान ही पशु-वृत्तियों का शमन कर पाते हैं।और भीऔर भी
जिस सरकार को आमतौर पर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आम आदमी के मानवाधिकारों की खास फिक्र नहीं रहती, उसे विदेश में काला धन रखनेवाले खास भारतीयों के मानवाधिकारों के उल्लंघन की भारी चिंता सता रही है। सोमवार को वित्त मंत्रालय की तरफ से कालेधन पर संसद में पेश श्वेतपत्र में कहा गया है कि सरकार ने दुनिया के जिन देशों के साथ दोहरा कराधान बचाव करार (डीटीएए) या कर सूचना विनिमय करार (टीआईईए) कर रखे हैं,औरऔर भी
काश! हम उतना ही पैदा करते, जितना वाकई आवश्यक है। लेकिन मुनाफा बढ़ाते जाने के इस दौर में अनावश्यक चीजें बनाई और ग्राहकों के गले उतारी जा रही हैं। इससे वो प्राकृतिक संपदा छीझती जा रही है जो फिर कभी वापस नहीं आएगी।और भीऔर भी
शब्दों का शोर है, घटाटोप है। अर्द्धसत्य का बोलबाला है। हर कोई अपने स्वार्थ के हिसाब से सत्य को परिभाषित करने में जुटा है। ऐसे में निरपेक्ष सत्य क्या है? बहुजन के हितों का पोषक सत्य क्या है? यह खुद बहुजन को ही खोजकर निकालना होगा।और भीऔर भी
सोते हुए को जगाना आसान है, जगते हुए को जगाना मुश्किल। लेकिन जो लोग जागते हुए भी सोते रहते हैं, वे किसी और का नहीं, अपना ही नुकसान करते हैं। असहज अवस्था में होने के कारण फालतू चीजें भी उनके लिए घातक बन जाती हैं।और भीऔर भी
ये सृष्टि एक मिलीजुली कोशिश का नतीजा है। सूक्ष्म से सूक्ष्म कणों ने भी नियमबद्ध होकर बेहद तार्किक तरीके से इसको रचने में अपना भरपूर योगदान दिया है। ये दुनिया, ये ब्रह्माण्ड इसी कोशिश और कुछ प्राकृतिक नियमों का उद्घोष भर है।और भीऔर भी
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