कृपा बरसती रही, साम्राज्य बढ़ता गया!
दस साल पहले तक गौतम अडाणी देश के एक सामान्य उद्योगपति थे। साल 2014 में उनकी नेटवर्थ 44,000 करोड़ रुपए हुआ करती थी। लेकिन साल 2024 तक उनकी नेटवर्थ 11.6 लाख करोड़ रुपए की हो गई। जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद उनकी दौलत 57% घटकर 4.74 करोड़ रुपए पर आ गई थी। लेकिन अगले साल उनकी दौलत में 95% छलांग लग गई। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट में हिसाब लगाया गया हैऔरऔर भी
अडाणी ने लगाया ब्रांड इंडिया पर दाग!
देश का मतलब सरकार नहीं होता और न ही किसी व्यक्ति को देश का पर्याय बनाया जा सकता है। अपने यहां महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और लाल बहादुर शास्त्री जैसी महान हस्तियां हुईं। लेकिन किसी ने खुद को भारत का पर्याय नहीं बताया। कांग्रेस के अध्यक्ष देवकांत बरुआ ने 1974 में ‘इंडिया इज़ इंदिरा, इंदिरा इज़ इंडिया’ का नारा दिया था। लेकिन देश ने कभी इसे स्वीकार नहीं किया और इंदिरा गांधीऔरऔर भी
दबाव है तात्कालिक, ये भी बीत जाएगा
सालों-साल से बनाया जा रहा 24-25 स्टॉक्स का जो पोर्टफोलियो सितंबर तक 60-62% फायदा दिखा रहा था, दो महीने में ही वहां फायदा 30-32% तक सिमट जाए तो किसी का भी दुखी हो जाना स्वाभाविक है। कमज़ोर कंपनियों के शेयर गिर जाएं तो समझ में आता है। लेकिन अच्छी-खासी मजबूत कंपनियों के शेयर घाटा देने लग जाएं तो धैर्यवान व समझदार निवेशक भी मायूस हो जाता है और खुद को असहाय महसूस करता है। लेकिन इतिहास साक्षीऔरऔर भी
फिक्र है चिंता भी, फिर भी मौके बहुतेरे!
याद रखें कि आप ट्रेडिंग कर रहे हैं, लम्बे समय का निवेश नहीं। फिर भी उन्हीं कंपनियों में ट्रेड करना चाहिए जो फंडामेंटल स्तर पर मजबूत हों। कभी कमज़ोर कंपनियों के स्टॉक्स में ट्रेड न करें। यकीनन, निवेश के लिए दो-तीन साल या ज्यादा का टाइमफ्रेम लेकर चलना पड़ता है। उठना-गिरना शेयर बाज़ार का स्वभाव है। कोरोना का प्रकोप बढ़ा तो बीएसई सेंसेक्स साल 2020 के शुरुआती दो-तीन महीनों में ही 41,000 अंक से गिरते-गिरते 30,000 अंकऔरऔर भी






