चरित्र को पकड़िए, चाल तो चलती है
भाव बढ़ते और गिरते हैं। लंबे निवेश के लिए इसका खास मतलब नहीं। मायने-मतलब है तो मूल्य का। भाव के लिए चुकाए गए धन के एवज में हमें मिलता है मूल्य। भाव हमें दिखता है। मूल्य दिखता नहीं, लेकिन हमारे निवेश की सार्थकता का सार है। भाव शरीर है तो मूल्य चरित्र है, आत्मा है। हम ऐसे ही मूल्यवान शेयरों को बराबर यहां पेश करते रहे हैं। मसलन, अतुल लिमिटेड तीन साल में तीन गुना हो गया…औरऔर भी
हठी विक्रमादित्य हारकर बने वेताल
जो लोग अपनी बचत को महंगाई की मार से बचाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट, सोना या रीयल एस्टेट के अलावा म्यूचुअल फंड व शेयरों में लगाते हैं, वे पक्के निवेशक हैं और उन पर इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि शेयर बाज़ार कब, कैसे, कहां दिशा बदलनेवाला है। लेकिन जो लोग हर महीने का खर्च जुटाने के लिए शॉर्ट-टर्म ट्रेडर हैं या पांच-दस साल के बड़े टाइमफ्रेम में दौलत जुटाने में लगे लांग-टर्म ट्रेडर हैं, उनकेऔरऔर भी
बाज़ार ने हराया, इसमें काहे की हेठी!
ट्रेडिंग से कमाई के लिए हमेशा सही होना ज़रूरी नहीं। सच तो यह है कि बाज़ार आपको ज्यादातर हराएगा। इसमें कोई हेठी नहीं, बल्कि सीख मिलती है कि अतिविश्वास कितना घातक हो सकता है। असली सूत्र है कि जब कभी बाज़ार आपको गलत साबित करे, आप पतली गली से निकल लें। इसका सबसे कारगर ज़रिया है स्टॉप लॉस। जो चक्रव्यूह में घुसकर निकलना नहीं जानते, उनका हश्र अभिमन्यु जैसा ही होता है। देखें अब आज का हाल…औरऔर भी
ख्बाव नहीं, यहां ज़रूरी है सच देखना
ख्वाब देखना ऐसी विलासिता है जिसे शेयर बाज़ार में बड़े से बड़ा ट्रेडर भी नहीं चला सकता। वो बरबाद हो जाएगा। इसलिए अगर आपके सौदे किसी ख्वाब या गट-फीलिंग पर आधारित हैं तो बेहतर यही होगा कि आप अपना धन शेयरों की जगह योग साधना या अच्छे मनोवैज्ञानिक की सलाह पर खर्च कर दें। वरना, यह गट-फीलिंग आपको एक दिन ले बीतेगी। ट्रेडिंग के लिए सच देखना जरूरी है, ख्वाब नहीं। अब देखते हैं आज का सच…औरऔर भी
न घाटे पर लस्त, न मुनाफे पर मस्त
यूं तो ज्यादातर ट्रेडर हाई ब्लड-प्रेशर के शिकार होते है। लेकिन उत्तेजना में जीनेवाले ट्रेडर ज्यादा टिकते नहीं। लाभ-हानि दोनों ही अवस्था में जो शांत रहते हैं, वही टिकते हैं। सौदे में बड़ी कमाई से चहकनेवाले ट्रेडर उस वकील जैसे हैं जो मुकदमे के बीच ही नोट गिनने लगता है। वहीं घाटा खाकर लस्त पड़नेवाले ट्रेडर उस सर्जन जैसे हैं जो ऑपरेशन टेबल पर मरीज का खून देखकर बेहोश हो जाता है। अब बाज़ार पर शांत नज़र…औरऔर भी





