शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग कुछ इंडीकेटरों या टिप्स का करतब नहीं, बल्कि एक कौशल है जिसे हर किसी को अपने अंदाज़ में विकसित करना पड़ता है। हिंदी में इससे जुड़ी किताबें भले ही न हों, पर अंग्रेज़ी में हज़ारों किताबें हैं। पिछले दो शनिवार को मैंने इसी कॉलम में पांच किताबों का लिंक दिया है। यह सेवा सब्सक्राइब न करनेवाले पाठक भी इन्हें देख सकते हैं। ये कुछ चुनिंदा मूलभूत किताबें हैं जिन्हें ट्रेडिंग की तैयारी केऔरऔर भी

विचार और विश्वास धीरे-धीरे हमारी आदत का हिस्सा बन जाते हैं। फिर इन्हीं के चश्मे से हम सच को देखने लगते हैं और वो टेढ़ामेढ़ा हो जाता है। विकृत सच हमें गलत एक्शन को उकसाता है। हम हारने और खीझने लगते हैं। लेकिन आदत की ताकत हासिल कर चुके विचारों को बदला जा सकता है। इसका अचूक तरीका है अभ्यास। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं अभ्यासेन कौन्तेय। अभ्यास को आगे बढ़ाते हुए डालते हैं आज पर नज़र…औरऔर भी

विश्वविजयी होना, सब पर राज करना बड़ी सहज मानवीय इच्छा है। बाज़ार को भी हम मुठ्ठी में कर लेना चाहते हैं। चाहते हैं कि वो हमारे विचार से चले। धीरे-धीरे ऐसे सूत्र का भ्रम पाल लेते हैं जिसकी बदौलत हम न्यूनतम भाव पर खरीदकर उच्चतम पर बेच सकते हैं। तमाम ट्रेडर/निवेशक ऐसा सोचकर दांव पर दांव लगाते जाते हैं। ऐसे लोग ज़िदगी में बहुत सारी नाकामियां झेलने के लिए अभिशप्त हैं। कैसे बचें इससे, आइए देखते हैं…औरऔर भी

जिस तरह कुशल पहलवान विरोधी के वजन को ही उसे धूल चटाने के लिए इस्तेमाल करता है, उसी तरह बाज़ार ट्रेडर की हर छिपी कमज़ोरी का इस्तेमाल उसे पटखनी देने के लिए करता है। लालची ट्रेडर अपनी औकात से कहीं ज्यादा बड़ी खरीद से पिटते हैं। डरपोक ट्रेडर जीतती बाज़ी तक छोड़कर भाग निकलते हैं। वहीं, आलसी ट्रेडर बाज़ार के पसंदीदा शिकार हैं। वो उन्हें अपनी तेज़ी से मारता है। अब करें ट्रेडिंग की साधना का अभ्यास…औरऔर भी

पैसा बड़े-बड़ों को हिलाकर रख देता है। 50% डिस्काउंट मिले तो हम दोगुनी खरीदारी कर डालते हैं। साथ में कुछ मुफ्त ऑफर हो तो महंगी चीज़ तक खरीद डालते हैं। पैसा हमें भावनाओं की ऐसी भंवर में उलझा देता है जहां हम तर्कसंगत फैसले नहीं कर पाते, जबकि ट्रेडिंग तर्कसंगत व्यवहार की मांग करती है। पैसे पर फोकस रहेगा तो ट्रेडिंग में फिसल जाएंगे। कुशल ट्रेडिंग पर ध्यान रहेगा तो पैसा अपने-आप आएगा। अब आज की ट्रेडिंग…औरऔर भी