भाव भले भगवान, पर निकाले इंसान
शेयर का भाव ठीक उस वक्त खरीदारों और विक्रेताओं के बीच स्वीकृत मूल्य को दर्शाता है। तेजड़िया इस उम्मीद में खरीदता है कि भाव आगे बढ़ेगा। मंदड़िया इस भरोसे में बेचता है कि भाव गिरेगा। ये चारों तरफ से ऐसे निवेशकों/ट्रेडरों से घिरे रहते हैं जो दुविधाग्रस्त हैं। दुविधा छोड़ ऐसे लोग बाज़ी न मार ले जाएं, यह डर तेजड़ियों और मंदड़ियों से सौदा करवाता है और निकलता है भाव। उतरें अब भावों की ताज़ा भंवर में…औरऔर भी
भीड़ के साथ भी और भीड़ के बाद भी
शेयरों के भाव विशेषज्ञ, विश्लेषक या सलाहकार नहीं, बल्कि भीड़ तय करती है। लेकिन जब भीड़ में शामिल अधिकांश लोगों पर तेज़ी का सुरूर चढ़ जाए तो इस तेज़ी को आगे बढ़ाने के लिए खरीदार घट जाते हैं। गिरावट शुरू हो जाती है। तब हर कोई बेचने लगता है। इसकी अति पर चक्र फिर वापस मुड़ जाता है। समझदार ट्रेडर भीड़ के साथ चलने के साथ-साथ इन अतियों का बराबर शिकार करते हैं। अब आज का बाज़ार…औरऔर भी
लालच को दबाओ, भविष्य को संवारो
वजहें और भी हैं पिछले कुछ सालों में शेयर बाज़ार से हमारी दूरियां बढ़ने की। पर खास वजह है मल्टीबैगर के नाम पर केवल और केवल स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स का लालच फेंकना। न जाने कितने निवेशकों का धन ऐसी कंपनियों में आधे या एक तिहाई से भी नीचे आ चुका है। तथास्तु देश की एकमात्र ऐसी संतुलित और भरोसेमंद सेवा है जो आपके लालच को नहीं, भविष्य को संवारती है। लंबे निवेश का एक और मौका…औरऔर भी
न जादुई ताबीज़, न चिरागे-अलादीन
शेयर बाज़ार में ज्यादातर वही लोग आते हैं, जिनके पास झमाझम धन होता है। गरीब-गुरबां बहुत हुआ तो लॉटरी या जुए तक सिमटकर रह जाते हैं। लेकिन इन अतियों के बीच देश भर में शायद लाखों लोग ऐसे होंगे जो शेयर बाज़ार में इफरात धन बनाने के मकसद से उतरते हैं। शेयर बाजार में हर दिन करीब 3.15 लाख करोड़ रुपए का टर्नओवर होता है। उन्हें लगता है कि इसमें से हर महीने तीस-चालीस हज़ार रुपए तोऔरऔर भी
साध लें तो सरल, जटिल है अन्यथा
ट्रेडिंग कोई सीधा-सरल सहज नहीं, बल्कि जटिल खेल है। अनिश्चितता की भंवर में आपको फैसला करना होता है। फैसला इस आधार पर कि पल-पल बदलते भावों का पैटर्न क्या है? यह समझ कि भीड़ का झुकाव ठीक इस वक्त किधर है? तेजी और मंदी के खेमे में किसका पलड़ा भारी है? पूंजी बड़ी हो तो खरीदने-बेचने के सौदे साथ कर सकते हैं। लेकिन कम पूंजी में ऐसा मुमकिन नहीं। चलिए करें इस जटिलता को सुलझाने का अभ्यास…औरऔर भी





