बिजनेस चैनलों का अपना बिजनेस मॉडल है। ज्ञान देते एनालिस्टों के खाने कमाने का अपना मॉडल है। आर्थिक अखबारों का अलग बिजनेस मॉडल है। हम जित्ता इन्हें देखते या पढ़ते हैं, इनका धंधा उत्ता चमकता है। मुनाफा ही उनका ध्येय है, खबर उनका धंधा है। हमारा भला उनके लिए रत्ती भर मायने नहीं रखता। ट्रेडिंग भी एक धंधा है तो किसी गैर को नहीं, हमें ही इसका बिजनेस मॉडल बनाना होगा। अब देखते हैं आज का बाज़ार…औरऔर भी

ट्रेडिंग आसान है। ब्रोकर के पास डीमैट एकाउंट खुलवाया और शुरू हो गए। पर सफल ट्रेडर बनना बेहद मुश्किल है। मुश्किल इसलिए नहीं कि यह कोई रॉकेट साइंस है, बल्कि इसलिए कि आपको सामनेवाले शख्स को हराना है। बड़ी पूंजी के साथ प्रोफेशनल्स बैठे हैं सामने। कोई शेखचिल्ली उनसे कभी नहीं जीत सकता। उन्हें हराने के लिए उनके जैसा ही दक्ष बनना पड़ता है, अध्ययन और कठोर अभ्यास करना पड़ता है। इसी कड़ी में बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

इस हफ्ते एक के बाद एक तीन अहम खबरें आने वाली हैं। आज सरकार अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक से जुड़ी मुद्रास्फीति का आंकड़ा जारी करेगी। बुधवार को अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की समिति बांड खरीद पर कुछ बोलेगी। फिर शुक्रवार को रिजर्व बैंक के नए गवर्नर रघुराम राजन बीच तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेंगे। इस तरह इस हफ्ते 16, 18 और 20 सितंबर के दिन काफी अहम हैं। अब आगाज़ इस हफ्ते का…औरऔर भी

सालों-साल से ट्रकों के पीछे लिखा रहता है देखो मगर प्यार से। लेकिन शेयर बाज़ार ऐसी चीज़ है जिसे देश के 92% लोग हिकारत से देखते हैं। बाकी लोग प्यार नहीं, लालच की नज़र से देखते हैं। सोचते और पूछते हैं कि बाज़ार कल या छह महीने बाद कहां तक जाएगा। असल सवाल उन्हें पूछना चाहिए कि जिस कंपनी का शेयर खरीद रहे हैं, उसका धंधा कहां जाएगा। ऐसा सोचना आवश्यक है। अब आज का लंबा निवेश…औरऔर भी

मित्रों! मेरा मकसद न तो आपको टिप्स देना है और न ही आपसे कमाई करना। मेरा पहला मकसद है उन सूचनाओं की खाईं को भरना जो अंग्रेज़ी जाननेवालों को आसानी से मिल जाती हैं, जबकि हिंदी जगत अंधेरे में टटोलता रहता है। यही हाल मराठी और अन्य भारतीय भाषाएं बोलने वालों का है। दूसरा मकसद है अंग्रेज़ी जाननवाले भी जिन जटिलताओं से घबराते हैं, उन्हें सुलझा देना। अब ट्रेडिंग की ऐसी ही कुछ उलझनों को सुलझाने केऔरऔर भी