मूल्यहीनता के इस दौर में छिपा मूल्य खोजकर निकालते हैं। हम अवरुद्ध प्रवाह को खोलते हैं। अर्थव्यवस्था की धमनियों में धन का संचार करते हैं हम। हम भजन नहीं गाते कि जाहे विधि राखे राम, वाहे विधि रहिए और न बौद्धिक लफ्फाज़ी करते हैं। जो पल गुजर गया, उस पर नज़र रखकर हम हर आनेवाले पल की लगाम कसते हैं। समय पर सवार हैं क्योंकि हम ट्रेडर हैं। उतरते हैं शेयर बाज़ार के ऐसे ही संसार में…औरऔर भी

जिस चीज़ की मांग न हो, उसका आप कितना भी ढिढोरा पीट लें, वो चीज़ और उसे बनानेवाली कंपनी बाज़ार में कभी टिक नहीं सकती। लेकिन जिस चीज़ की जबरदस्त मांग हो और कोई कंपनी बहुत सलीके से उसे बराबर बना रही हो, उसको जमने से कोई रोक नहीं सकता। आज तथास्तु में लंबे निवेश के लिए पेश है ऐसी ही एक कंपनी। इस कंपनी का बिजनेस मॉडल बड़ा मजबूत है। लेकिन है यह एक लार्ज-कैप कंपनी…औरऔर भी

हर अनुभवी ट्रेडर ट्रेंड को फ्रेंड मानता है। लेकिन इस पारंपरिक और प्रचलित सोच के साथ दो समस्याएं हैं। पहली यह कि ट्रेंड जारी रहा तो यकीनन फायदा होता है। पर इसकी मात्रा इतनी सीमित हो सकती है कि ब्रोकरेज़ व दूसरे खर्च काटने के बाद हो सकता है कि ट्रेंड पर किया गया ट्रेड फालतू की मशक्कत बन जाए। दूसरी समस्या यह है कि मान लीजिए कि आपने सौदे को जैसे ही हाथ लगाया, वैसे हीऔरऔर भी

हम मानते हैं कि जितना रिस्क, उतना रिवॉर्ड। ज्यादा रिस्क, ज्यादा फायदा। दिक्कत यह है कि फायदे की सोच में मगन होकर हम भूल जाते हैं कि ज्यादा रिस्क में पूंजी डूबने का खतरा भी ज्यादा होता है। वहीं ट्रेडिंग में भयंकर रिस्क की बात कही जाती है। लेकिन प्रोफेशनल ट्रेडर की खूबी होती है कि वो वही सौदे करता है जिसमें न्यूनतम रिस्क में अधिकतम फायदे की प्रायिकता सबसे ज्यादा होती है। अब शुक्र की ट्रेडिंग…औरऔर भी

जिस फाइनेंस क्षेत्र का काम आम बचत को खींचकर देश के उद्योगीकरण में लगाना है, वह पूरी तरह लोगों को छलने में लगा है। शेयर बाज़ार का छल तो जगजाहिर है। लेकिन खतरनाक बात यह है कि इसमें बीमा से लेकर समूचा बैंकिंग क्षेत्र भी शामिल हो गया है। यहां तक कि सरकारी बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के कारिंदे भी किसी से कम नहीं हैं। हो सकता है कि आपको भी हाल में इसऔरऔर भी

जीवन के तमाम क्षेत्रों की तरह शेयर-ट्रेडिंग में भी कुछ नीति-वाक्य चलते हैं। कहते हैं कि इंट्रा-डे ट्रेडर को अगर दिन में लगातार तीन बार घाटा हो तो उस दिन उसे ट्रेडिंग रोक देनी चाहिए। स्विंग ट्रेडर का दांव अगर लगातार तीन दिन उल्टा पड़ जाए तो उसे दो दिन ऑफ ले लेना चाहिए। लेकिन दांव सही पड़ते-पड़ते ट्रेडिंग पूंजी दोगुनी हो जाए तो तीन दिन छुट्टी मनानी चाहिए। अनुशासन के साथ अब बढ़ें बाज़ार की ओर…औरऔर भी