आपने भी देखा होगा कि किसी स्टॉक के बजाय लोगों की आम दिलचस्पी इसमें होती है कि बाज़ार कहां जा रहा है। जैसे कोई मिलने पर पूछता है कि क्या हालचाल है, उसी तरह शेयर बाज़ार से वास्ता रखनेवाले छूटते ही पूछ बैठते हैं कि सेंसेक्स या निफ्टी कहां जा रहा है। चूंकि सेंसेक्स में शामिल सभी तीस कंपनियां निफ्टी की पचास कंपनियों में शामिल हैं। इसलिए हाल-फिलहाल बाज़ार कहां जा रहा है, का मतलब होता हैऔरऔर भी

एक तरफ अमेरिका का केंद्रीय बैंक उपाय सोच रहा है कि मौजूदा मौद्रिक ढील को कड़ा कैसे किया जाए, हर महीने 85 अरब डॉलर की बांड खरीद के दुष्चक्र से कैसे निकला जाए। दूसरी तरफ डाउ जोन्स सूचकांक गुरुवार को इतिहास में पहली बार 16,000 के पार चला गया क्योंकि बेरोजगारी की दर बिगड़कर 7.3% हो गई है और इसके सुधरकर 6.5% तक आने तक बांड खरीद रुक नहीं सकती। ऐसा है बाज़ार। अब ट्रेडिंग शुक्रवार की…औरऔर भी

इंसान हैं तो भावनाएं हैं और उनका रहना स्वाभाविक भी है। लेंकिन दुनिया में कामयाबी के लिए भावनाओं पर लगाम लगाना पड़ता है। बताते हैं कि भावनात्मक दिमाग और तार्किक दिमाग में 24:1 का अनुपात होता है। पैसे के मामले में हम और भी ज्यादा भावनात्मक हो जाते हैं। हम सब कुछ जानते-समझते हुए भी दिल की ज्यादा सुनते हैं। ट्रेडिंग में कामयाबी के लिए जरूरी है कि हम दिमाग की ज्यादा सुनें। अब रुख बाज़ार का…औरऔर भी

अक्सर हम जैसे आम ट्रेडरों का छोटा-मोटा ग्रुप होता है। यह ग्रुप आपसी राय से सौदे करता है। सभी लगभग समान इंडीकेटरों का इस्तेमाल करते हैं। यह समूह में चलने की सहज पशु-वृत्ति है। इसमें कोई बुराई नहीं। लेकिन समूह के फेर में पड़कर हम मतिभ्रम का शिकार भी हो सकते हैं। फिर, आज इंटरनेट जैसी टेक्नोलॉजी ने सब कुछ इतना व्यवस्थित कर दिया है कि हम अकेले बहुत कुछ कर सकते हैं। अब बुधवार का वार…औरऔर भी

जो लोग भी आपको टिप्स बांटते हैं, चाहे वे ब्रोकर फर्में हों या तथाकथित स्वतंत्र एनालिस्ट, उनसे कभी पूछिए कि इनका आधार क्या है? अगर आधार घोषित/अघोषित खबर है तो यकीन मानिए कि गन्ने का सारा रस निचुड़ जाने के बाद अब खोइया ही बची है। अगर टेक्निकल एनालिसिस है तो वह गुजरे हुए पल के डाटा पर आधारित है। फिर, इसमें तो हज़ारों लोग माहिर हैं तो आप औरों से जीतोगे कैसे! सोचिए। बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी