अपने यहां विदेशी व देशी संस्थाओं के साथ बड़े निवेशकों में आते हैं एचएनआई या हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल। डेरिवेटिव सेगमेंट में तो ये संस्थाओं पर भी भारी पड़ते हैं। कोटक वेल्थ मैनेजमेंट की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक 25 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेशयोग्य धन रखने वाले ऐसे लोगों की संख्या करीब 1.17 लाख हैं। इन्होंने अपने धन का करीब 38% इक्विटी में लगा रखा है। ट्रेडिंग रणनीति में इन पर भी रखें ध्यान। अब दिशा मंगल की…औरऔर भी

प्रोफेशनल ट्रेडर अगर छुट्टी पर न गया हो तो बाज़ार में नौसिखिया ट्रेडरों के जीतने की कोई गुंजाइश नहीं होती। प्रोफेशनल ट्रेडरों में मंजे हुए लोगों के साथ ही बैंक, एफआईआई, बीमा कंपनियों व म्यूचुअल फंडों के वेतन या कमीशन पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा अपने यहां कंपनी प्रवर्तकों से जुड़े इनसाइडर ट्रेडर भी सक्रिय हैं। लालच में यहां हाथ झुलाते घुस गए तो आपका लुटना तय है। अब नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

गांव-देहात से लेकर शहर के तमाम लोग अब पढ़-लिखकर नौकरी का इंतज़ार करने की निरर्थकता समझने लगे हैं। उन्हें लगता है कि इससे तो बिजनेस करना ही ठीक है। पर बिजनेस में ज्यादातर लोगों की सोच व्यापार या दलाली से ऊपर नहीं जाती। जिनकी सोच इससे ऊपर जाती है उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं होती। ऐसे ही लोगों को बिजनेस में उतरने का मौका देता है बनी-बनाई कंपनियों के शेयरों में निवेश। आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

जमकर रिसर्च की। ट्रेडिंग के लिए स्टॉक चुना। सौदा किया, घाटा लगा। फिर सारा ज्ञान-ध्यान लगाया। लेकिन ट्रेड किया, फिर घाटा। ऐसा लगातार तीन-चार बार हो जाए तो मन में बैठ जाता है कि कहीं हमसे भारी चूक हो रही है या म्हारी किस्मत ही खोटी है। लेकिन लगातार घाटा सफलतम ट्रेडर भी खाते हैं। फर्क इतना है कि वे बाज़ार का मनमानापन मानते हैं; दिल नहीं डुबाते; औसत कमाई पर लगाते ध्यान। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी