ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर वही, चार्ट वही, वही सारे इंडीकेडर। पर कामयाब ट्रेडरों के तरीके भिन्न होते हैं। उसी तरह जैसे एक ही परिवार के चार भाई एक-सा भोजन करने के बावजूद अलग अंदाज़ में बढ़ते हैं। हर किसी को अपने व्यक्तित्व के हिसाब से ट्रेडिंग सिस्टम बनाना पड़ता है। एसएमए व ईएमए, आरएसआई, कैंडल का पैटर्न, संस्थाओं की खरीद व बिक्री का संतुलन। कुछ तो बस इन्हीं से बाज़ार पीट डालते हैं। अब नब्ज़ मंगल के बाज़ार की…औरऔर भी

अगर आपका धन किसी और के खाते में चला जा रहा है तो ठहरकर सोचिए। दूसरे क्या करते हैं, इसके बजाय इस पर ध्यान लगाइए कि ठीक आपकी आंखों के आगे ट्रेडिंग-स्क्रीन पर क्या हो रहा है? दिन, हफ्ते, महीने या साल के चार्ट क्या बोलते हैं? आपके अगल-बगल क्या हो रहा है, इसकी तह में पहुंचने की कोशिश कीजिए। फिर शुद्ध व्यापारी/वणिक बुद्धि लगाइए। थोक के भाव खरीदिए, रिटेल के भाव बेचिए। अब सोम की संभावना…औरऔर भी

इंसान की न इच्छाओं का अंत है और न ज़रूरतों का। इसीलिए इन्हें पूरा करने में लगी नई-नई कंपनियों के आने का भी कोई अंत नहीं। जो व्यापक लोगों की ज़रूरत को जितना बेहतर पूरा करती है, वो उतनी ही सफल कंपनी बन जाती है। उपयोगी चीज़ बनाती है, जीवन में मूल्य जोड़ती है तो लोग भी उसे दाम देकर बढ़ाते जाते हैं। नतीज़तन उसके स्वामित्व/शेयर का मूल्य बढता जाता है। तथास्तु में ऐसी ही मूल्य-युक्त कंपनी…औरऔर भी

शेयरों में ट्रेडिंग और निवेश में सफलता इससे नहीं मिलती कि कितनी तेज़ सूचनाएं आप तक पहुंचती हैं या आपने कितनी पोथियां बांच रखी हैं। यहां सफलता इस बात से तय होती है कि वाजिब सूचनाएं और शिक्षा आप तक पहुंची है या नहीं। मेरे एक मित्र हैं। कुछ दिनों पहले तक फेसबुक पर निवेश व ट्रेडिंग की सलाहें खटाखट मुफ्त में दिया करते थे। लेकिन फालतू-निरर्थक निकला तो एकाउंट बंद कर दिया। अब शुक्रवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी