फाइनेंस बाज़ार में बुल्स और बियर्स की तरह कई जानवरों के नाम चलते हैं। इनमें से एक है हॉग्स/पिग्स या हिंदी में बोलें तो सुअर। इसका अभिप्राय उन निवेशकों/ट्रेडरों से होता है जो बेहद लालची व अधीर होते हैं, ब्रोकर या वेबसाइट की ‘हॉट’ टिप पर बल्लियों उछलते हैं और रिसर्च करना या जानकारी जुटाना क्लेश समझते हैं। सुअर भले ही मुश्किल से मरे, लेकिन ‘पिग्स’ निवेशक आसानी से कुर्बान हो जाते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

लोग अक्सर सोचते हैं क्योंकि कम लोग ही ट्रेडिंग में कामयाब होते हैं इसलिए इससे पैसे कमाने की कोई बहुत ही जटिल प्रक्रिया होती होगी। तमाम दुस्साहसी लोग खुद आजमाने और जमकर घाटा खाने के बाद यह राय बनाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि हम समझ जाएं तो ट्रेडिंग एकदम सीधी-सरल चीज है। उलझने के लिए बहुत सारे जाल ज़रूर है। पर भाव ही सारा रहस्य खोलकर बहुत कुछ कह जाता है। अब मंगल की विजय…औरऔर भी

15 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक के 17 ट्रेडिंग सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में 7847.23 करोड़ रुपए (1.28 अरब डॉलर) की शुद्ध बिकवाली की, निफ्टी 2.26% गिर गया। क्या इसका मतलब यह कि मोदी प्रभाव से साल 2014 में अब तक करीब 25% बढ़ा बाज़ार ठंडा होने लगा है और विदेशी निवेशकों में निराशा घर करने लगी है? दरअसल, यह करेक्शन है बस। अब नए हफ्ते की दस्तक…औरऔर भी

हर कोई बेहतरीन खाना नहीं बना सकता, लेकिन अच्छे खाने की तारीफ तो हर कोई कर सकता है। इसी तरह हर कोई अच्छा बिजनेस नहीं चला सकता। लेकिन कौन-सा बिजनेस अच्छा है, कहां मार्जिन ज्यादा है, संभावना अधिक है, यह बात दिमाग पर थोड़ा-सा ज़ोर लगाकर कोई भी समझ सकता है। शेयर बाज़ार में निवेश करना है तो यही समझना पड़ता है। हम बस इतना कर लें तो बाकी काम कंपनी कर डालेगी। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी