रिस्क भले ही ज्यादा हो, लेकिन कम दिखे तो लोग उधर ही भागते हैं। अपने यहां शेयर बाज़ार में यही हो रहा है। लोगबाग डेरिवेटिव ट्रेडिंग की तरफ टूटे पड़े हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग वोल्यूम में देशी-विदेशी संस्थाओं का हिस्सा मात्र 17% है और बाकी 83% सौदे रिटेल व प्रॉपराइटरी ट्रेडर करते हैं जबकि लिस्टेड कंपनियों में इनका निवेश मात्र 18% है। काया को छोड़ पकड़ी छाया की माया! अब आगाज़ हफ्ते का…औरऔर भी

सच है कि खेती में बरक्कत नहीं। नौकरी में भी बरक्कत नहीं, बस गुजारा चल जाता है। दलाल ही हर तरफ चहकते दिखते हैं। पर यह आंशिक सच है। इसी समाज में नारायणमूर्ति जैसे लोग भी हैं। इनफोसिस के शेयरों की बदौलत उनका ड्राइवर भी चंद सालों में करोड़पति बन गया। हमें धंधे में बरक्कत करनेवाली ऐसी कंपनियां ही चुननी होंगी। इनमें निजी कंपनियां भी हैं और सरकारी भी। आज तथास्तु में ऐसी ही एक सरकारी कंपनी…औरऔर भी

मेरे एक जाननेवाले हैं, राजस्थान के। पढ़ाई से इंजीनियर, लेकिन पेशे से स्टॉक ट्रेडर। गजब का धैर्य है। इंट्रा-डे नहीं, स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेड करते हैं। महीने में कितना कमाते हैं, साफ नहीं बताते। कमाल यह कि स्टॉप लॉस ही नहीं लगाते। कहते हैं अच्छा चुनो, डटे रहो। ट्रेडिंग में भी लंबा अंदाज़ अपनाते हैं। आईटीसी में 315 पर 365 का लक्ष्य बनाकर घुसे तो वहीं पर निकले। अंदाज़ है अपना-अपना। पकड़ें अब शुक्र की दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में खरीदना या बेचना, लॉन्ग या शॉर्ट ही नहीं, कैश भी एक पोजिशन है। हर पहलू कायदे से जांच-परख लिया है और मूर्ख अहंकारी का नहीं, विनम्र जानकार का आत्मविश्वास है तो सौदा कर डालिए। पर ज़रा-सी भी दुविधा है तो कुछ मत कीजिए। कैश बचाकर रखिए। नहीं जानते कि क्या करने जा रहे हैं तो यकीन मानिए कि शेर आपको खा जाएगा। यहां न जाननेवाले पिटते और जाननेवाले कमाते हैं। अब तलाशें गुरुवार का मंत्र…औरऔर भी

कश्मीर में क्या कैसे हुआ, पता नहीं। लेकिन मौसम का पूर्वानुमान खास मुश्किल नहीं है। एक दिन नहीं, एक हफ्ते पहले भी काफी सही अनुमान लगाया जा सकता है क्योंकि वहां सिग्नल काफी स्पष्ट होते हैं। पर वित्तीय बाज़ार में आगे का अनुमान लगाना बेहद कठिन है क्योंकि यहां सिग्नल कमज़ोर और शोर ज्यादा होता है। इसलिए यहां सफल वही होते हैं जो रिटर्न के साथ रिस्क को संभालते हुए चलते हैं। अब लगाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी