यह हमारी सीमा, वह हमारी कमज़ोरी
कोई शेयर अगर नई खबर आने पर जमकर घट-बढ़ गया और हम उसकी चाल को नहीं पकड़ पाए तो यह हमारी गलती नहीं, बल्कि सीमा है। न्यूज़ के मामले में हम हमेशा फिसड्डी ही रहेंगे। दूसरा हमें खबर नहीं, झांसा देता है। चैनल हमें बम नहीं, उसकी खाली खोल थमाते हैं। लेकिन सामान्य हालात में अगर हम खरीदने-बेचनेवालों का संतुलन देखकर शेयर की भावी चाल नहीं भांप सके तो यह हमारी कमज़ोरी है। अब धार मंगलवार की…औरऔर भी
ट्रेडरों के तमाम प्रकार, कौन-से आप
बाज़ार के अलग-अलग दौर में ट्रेडिंग की रणनीति अलग होती है। तेज़ी, मंदी व स्थिरता में अलग। अलग-अलग तरह के ट्रेडरों की रणनीति भी भिन्न होती है। इंट्रा-डे वाले कल का रिस्क नहीं चाहते तो सौदे दिन में निपटा देते हैं। वे ज्यादा उछलकूद मचानेवाले शेयर चुनते हैं। पोजिशनल ट्रेडर वाले मंथर गति से बढ़नेवाले शेयर चुनते हैं। स्विंग और मोमेंटम ट्रेड वाले खास किस्म के शेयर चुनते हैं। सोचिए! कहां हैं आप? अब सोम का व्योम…औरऔर भी
आने लगे आईपीओ, पर यह अच्छा है
बरसात में कुकुरमुत्ते बहुत उगते हैं। पर बादलों की गरज और धरती की नमी के बीच प्राकृतिक मशरूम भी अच्छे निकलते हैं। बस, हमें कुकुरमुत्ते और प्राकृतिक मशरूम का फर्क समझ में आना चाहिए। इसी तरह शेयर बाज़ार में तेज़ी आती है तो आईपीओ भी जमकर आते हैं। अगले 10-12 महीनों में 14 कंपनियां पूंजी बाज़ार से करीब दस हज़ार करोड़ रुपए जुटाने वाली हैं। अब की बार तथास्तु में कुकुरमुत्तों के बीच का एक अच्छा मशरूम…औरऔर भी
न घाटे का दलदल, न डूबे कभी दिल
बात बड़ी विचित्र, किंतु सत्य है। जिस पल आप ट्रेडिंग के नुकसान को दिल पर लेना बंद कर देते हैं, आपके कामयाब ट्रेडर बनने की यात्रा शुरू हो जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि तभी आप जो जैसा है, उसको वैसा देख पाते हो। लेकिन मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, यह कहने में आसान, करने में बेहद कठिन है। दीर्घकालिक प्रक्रिया है इसकी। इस अवस्था तक पहुंचने में बहुतों को महीनों नहीं, सालों लग जाते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी






