एक ही बार सारी खरीद ज़रूरी नहीं
उद्योग में संभावना हो, कंपनी मजबूत हो, प्रबंधन अच्छा हो तो उसके शेयर हम कई बार थोड़ा-थोड़ा खरीद सकते हैं। पिछले एक-दो महीने में इसी कॉलम में बताई गई कुछ कंपनियों के शेयर गिरे हैं तो घबराने के बजाय उन्हें थोड़ा और खरीद लेना चाहिए। वहीं, जो कंपनी अपने अंतर्निहित मूल्य से ज्यादा भाव पर ट्रेड हो रही हो, उसके थोड़े शेयर अभी खरीदने चाहिए और बाकी बाद में। आज तथास्तु में ऐसी ही एक चढ़ी कंपनी…औरऔर भी
ऊंच ही नहीं, रखें नीच का भी हिसाब
हर कोई भविष्य जानने को बेचैन। खासकर शेयर बाज़ार में। वही उस्ताद जो एलानिया बोले कि बाज़ार कहां से कहां जाएगा। लोगबाग जेब जलाकर सीखते हैं कि वो धंधेबाज़ तो पूरा फेंकू था। याद रखें, सटीक भविष्यवाणी नामुमकिन है। वॉरेन बफेट तक की गणनाएं धोखा खा जाती हैं। इसलिए हम-आप या कोई भी हमेशा सही नहीं हो सकता। जो इसे समझता है वो ऊंच-नीच के हिसाब से चलता है। बाकी डूब जाते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
न पड़ें एनालिसिस के टेक्निकल्स में
कोई भी साधन अपने आप में साध्य नहीं होता। इसी तरह टेक्निकल एनालिसिस खुद में कोई अमोघ अस्त्र नहीं है। उसका काम बाज़ार में चल रहे भावों के पीछे की भावना को समझना है। वह बाज़ार के पीछे चलती है, आगे नहीं। ऐसे में जब एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल मार्केट एनालिस्ट के अध्यक्ष सुशील केडिया कहते हैं कि निफ्टी 7700 और रुपया प्रति डॉलर 57 तक जाएगा तो उनका बड़बोड़ापन ही इसमें झलकता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
रिटेल कहां! बाज़ार संस्थाओं का खेल
दुनिया के बांड बाज़ार में बड़ी उथल-पुथल मची है। रिटेल ट्रेडर बांड बाज़ार पर ध्यान नहीं देते। लेकिन अपने यहां बांड बाज़ार के कम विकसित होने के बावजूद देशी ही नहीं, विदेशी संस्थाएं तक इसमें जमकर खेलती हैं। हालांकि अपने शेयर बाज़ार में भी यही संस्थाएं असली रुख तय करती हैं। अच्छी खबर यह है कि विदेशी संस्थाएं इधर ठंडी पड़ रही हैं तो बड़ी भारतीय संस्था एलआईसी ने मोर्चा संभाल लिया है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी






