अब तक जिन भी ट्रेडरों से मिला हूं, ज्यादातर बराबर हैरान-परेशान दिखते हैं। फोन से लेकर सोशल मीडिया तक बोलते-बतियाते रहते हैं कि निफ्टी कहां जाएगा या कोई स्टॉक कहां तक मार करेगा। लगता है जैसे हरेक पल उन्हें किसी थ्रिल की ज़रूरत है। बिना डायरेक्टर के ‘एक्शन’ बोले हमेशा एक्शन में लगे रहते हैं। यह एक तरह की बीमारी है। हमें ट्रेडिंग में कामयाब होना है तो इस बीमारी से बचना होगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार हमेशा चक्रों में चलते हैं। तभी उसमें धन का प्रवाह बराबर बना रहता है। खबरें इस प्रवाह को चलाते रहने का बहाना हैं। फिर, अब तो दुनिया इतनी बड़ी हो गई है, ग्लोबल हो चुकी है कि अच्छी-बुरी खबरों का कोई टोटा नहीं रहता। उतार-चढ़ाव का चक्र न रहे तो ट्रेडिंग का धंधा ही बैठ जाएगा, बाज़ार में लिक्विडिटी या तरलता सूख जाएगी। यह बुनियादी सच समझना ज़रूरी है। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पांच साल पहले जब मैंने ‘मल्टी-बैगर’ शब्द सुना तो न कुछ समझ में आया, न ही किसी ने समझाया। बाद में पता चला कि इसका सीधा-सा मतलब है कई गुना बढ़नेवाले शेयर। प्रायः ये स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयर होते हैं। दिक्कत यह है कि ऐसे शेयर हफ्तों में आसमान छू लेते हैं, लेकिन दिनों में ही पाताल तक लुढ़क जाते हैं। इसलिए इनके चुनने में बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है। आज तथास्तु में एक संभावनामय स्मॉल-कैप कंपनी…औरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस के तमाम इंडीकेटर अपने-आप में अधूरे हैं क्योंकि वे अब तक जो हो चुका है, उसी से निकला संकेत देते हैं। इसीलिए उन्हें लैंगिग इंडीकेटर कहा जाता है। लेकिन ठीक पिछली कैंडलस्टिक की बनावट और भावों के स्तर के साथ उन्हें मिला दें तो भविष्य के प्रबल संकेतक बन जाते हैं। कल हमारे सुझाए इमामी लिमिटेड में यही कमाल दिखा, जब उसने एक ही दिन में हफ्ते का लक्ष्य पा लिया। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में रोज़-ब-रोज़ के भाव खबरों से प्रभावित होते हैं। लेकिन अगर हम दिन बढ़ाते जाएं तो तात्कालिक खबरों का असर कम हो जाता है। इसी रिस्क को कम करने के लिए हम स्विंग, मोमेंटम या पोजिशन ट्रेड का सहारा लेते हैं। बहुत से प्रोफेशनल ट्रेडर तो जिस दिन खबर रहती है, ट्रेड ही नहीं करते। कुछ तो साल में 20-25 दिन ही ट्रेड करके अपना निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लेते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी