जब आप वित्तीय बाज़ार में उतरते हैं तो कल्पना कीजिए कि आप किन शक्तियों के बीच खुद को डाल रहे हैं। लाखों लोग देश के, विदेश के। बैंकों के, पेंशन फंडों, म्यूचुअल फंडों व बीमा कंपनियों के, ब्रोकरेज़ हाउसों के। ऊपर से बहुत सारे प्रोफेशनल ट्रेडर/निवेशक जिनकी आजीविका इसी से चलती है। इन सबके बीच व्यक्तियों के नहीं, बल्कि सामूहिक विवेक से तय होता है किसी सूचकांक या स्टॉक का स्तर। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडर के तनाव से बचने का एक रास्ता यह है कि वो इंट्रा-डे ट्रेडिंग छोड़ दे। इससे बार-बार उसे बाज़ार और स्टॉक के भावों को देखने की ज़रूरत नहीं होगी। इसलिए उसे स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेड का ही सहारा लेना चाहिए। साथ ही बार-बार कंप्यूटर या मोबाइल पर भाव देखने की आदत छोड़ देनी चाहिए। तनाव से बचने का दूसरा तरीका यह है कि स्टॉप-लॉस लगाकर दिन में सुबह-शाम ही भाव देखें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में बहुत कुछ ऐसा है जो हमारे वश में नहीं। यहां लोगों का चकरघिन्नी बन जाना सहज है। बाज़ार की चाल के आगे सभी अक्सर खुद को बड़ा असहाय महसूस करते हैं, बशर्ते प्रवर्तकों से जुड़े इनसाइडर ट्रेडर या किसी देशी-विदेशी निवेशक संस्था का हिस्सा न हों। इसलिए स्वतंत्र व व्यक्तिगत ट्रेडर बड़े तनाव में रहते हैं। तनाव में बुद्धि नहीं काम करती तो सफल नहीं होते। क्या है बचने का रास्ता? फिलहाल बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

दुनिया के बाज़ार आपस में जुड़ चुके हैं तो पैमाने भी अब ग्लोबल हो गए हैं। अगर मोदी सरकार के एक साल की बात करें तो इस दौरान सेंसेक्स 11.84% और निफ्टी 13.74% बढ़ा है। लेकिन डॉलर के लिहाज से इस बीच एमएससीआई इंडिया सूचकांक मात्र 5.7% बढ़ा है, जबकि चीन का बाज़ार 35.56%, जापान 17.73% व अमेरिका 12.58% बढ़ा है। विदेशी निवेशकों के निकलने की एक वजह यह भी हो सकती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अल्गोरिदम ट्रेडिंग को लेकर बड़ा डर और हौवा है। लेकिन असल में यह चंद नियमों पर अमल का माध्यम भर है। यह अमल कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर करे या हमारा दिमाग, बात एक है। इसमें बस करते यह हैं कि कुछ नियमों – जैसे, मूविंग एवरेज, ट्रेडिंग वोल्यूम का पैटर्न, खरीदने-बेचने के भाव का अंतर व आरएसआई वगैरह पर अमल करते हैं ताकि फैसले में भावनाओं नहीं, बुद्धि का दखल न हो। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी