ट्रेडिंग नहीं है दाएं-बाएं हाथ का खेल
इंजीनियरिंग या मेडिकल जैसी किसी भी प्रोफेशनल पढ़ाई में चार-पांच साल लगते हैं। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग को हम लोग दाएं-बाएं हाथ का खेल समझते हैं, जबकि यह एक साथ साइंस और आर्ट दोनों ही है। इसमें इसके विज्ञान को समझने के साथ ही कला में भी महारत हासिल करनी पड़ती है जिसके लिए काफी अभ्यास की ज़रूरत पड़ती है। फिर, हमें अपने मन व भावनाओं को भी ट्रेन करना पड़ता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
सरकार रिस्क-मुक्त, कंपनी रिस्की!
सरकारी बांडों या बैंकों की एफडी में निवेश सुरक्षित माना गया है क्योंकि उनका वास्ता सरकार की नीति, देश की आर्थिक स्थिति, रिजर्व बैंक और मौद्रिक नीति से होता है। हालांकि इनमें से भी रिस्क होता है। पर दुनिया भर में सरकार से जुड़े प्रपत्रों को रिस्क-मुक्त माना जाता है। वहीं, जब हम किसी कंपनी में निवेश करते हैं तो उसका बढ़ना-घटना उसके अपने कामकाज़ से जुडा होता है। आज तथास्तु में पेश है एक सरकारी कंपनी…औरऔर भी
सौदा सही या गलत, फर्क नहीं पड़ता
ट्रेडर का ध्यान किसी और बात के बजाय हमेशा इस पर रहना चाहिए कि वो अपनी पूंजी पर कितना रिटर्न कमा पा रहा है। आपके कितने सौदे सही बैठे और कितने गलत, यह महत्वपूर्ण नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि जो सौदे सही बैठे, उनमें आपने कितना कमाया और जो गलत बैठे, उनमें कितना गंवाया। यह मेरा नहीं, बल्कि अब तक के सबसे बड़े ट्रेडर जॉर्ज सोरोस का नीति-वाक्य है। हमेशा इसे याद रखें। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
सौदे में 2% से ज्यादा नुकसान घातक
ट्रेडिंग में धन प्रबंधन का एक तरीका पोजिशन साइज़िंग और दूसरा तरीका स्टॉप-लॉस है। स्टॉप-लॉस का स्तर हर शेयर के स्वभाव के हिसाब से तय होता है। वैसे, अगर आप ब्रोकरों या तथाकथित एनालिस्टों की सलाह पर गौर करें तो उनका स्टॉप-लॉस 5-10% तक के नुकसान का होता है। यह उनके फंसाने की चाल है। हमें रिस्क व रिवॉर्ड के आधार पर एक सौदे में 2% से ज्यादा नुकसान कतई नहीं उठाना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी






