हर कोई समान राय का हो जाए तो बाज़ार कभी चलेगा ही नहीं। मैं कुछ सोचता हूं तो आप उससे अलग या उलट सोचें तभी बाज़ार चल सकता है। मैंने सोचा कि बाज़ार बढ़ेगा तो खरीदूंगा। आपने सोचा कि कैसा बौडम है, बाज़ार तो गिरने जा रहा है और आप बेचेंगे। आपकी बिक्री, मेरी खरीद। दोनों से मिलकर सौदा पूरा होगा और बाज़ार चलेगा। इसलिए एक ही समय सभी सही नहीं हो सकते। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार कभी हमारे हिसाब से नहीं चलता। हमें ही बाज़ार के हिसाब से चलना पड़ता है। तभी हम उससे कमा पाते हैं। हम आगे बढ़कर अनुमान ज़रूर लगाते हैं। लेकिन मानकर चलते हैं कि अनुमान गलत भी हो सकता है। तभी तो स्टॉप-लॉस या पोजिशन साइजिंग के ज़रिए रिस्क को बांधकर चलते हैं। वैसे, लंबे निवेश के लिए अभी मौज का दौर है क्योंकि तमाम मजबूत स्टॉक्स गिरे पड़े हैं। तथास्तु में ऐसी ही एक दमदार कंपनी…औरऔर भी

हम वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग को इसीलिए चुनते हैं ताकि किसी बॉस की किटकिट न रहे। हम मालिक हों अपनी मर्जी के। आज़ाद हों। जब मन चाहे काम करें, न चाहे तो मौज करें। लेकिन यहां पहुंचते ही हम भावनाओं के गुलाम बन जाते हैं। फिर बाज़ार ऐसा धोबियापाट मारता है कि हम उठने-बैठने के काबिल तक नहीं रह जाते। अरे भाई, कमाने के लिए रोज़ाना ट्रेडिंग ज़रूरी तो नहीं! आइए, अब आखिरी दिन शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

सरकारें अक्सर घबरा जाती हैं कि शेयर बाज़ार कहीं ज्यादा न गिर जाए। अपने यहां भी मोदी सरकार बाज़ार गिरते ही फौरन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को पटाने में लग जाती है। हालांकि विदेशी निवेशक ज्यादा पाने की फिराक में लगे रहते हैं और बाज़ार का खेल जारी रहता है। वैसे भी, जानकार कहते हैं कि जब चीन जैसी मजबूत सरकार शेयर बाजार को नहीं संभाल पा रही है तो भारत की क्या बिसात! अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अजीब अंधेरगर्दी है वित्तीय बाज़ार के विद्वानों व विश्लेषकों की। एक तरफ कहते हैं कि रिजर्व बैंक को ब्याज दरें घटा देनी चाहिए ताकि बैंक उद्योग को कम ब्याज पर ऋण दे सकें और आर्थिक विकास तेज़ हों। वहीं, जब एचडीएफसी बैंक ने आधारभूत ब्याज दर 9.70 से घटाकर 9.35% कर दी तो कहने लगे कि इससे दूसरे बैंक भी ऐसा करने को मजबूर हो जाएंगे तो बैंकिंग उद्योग का मार्जिन घट जाएगा। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी