कंपनी का शेयर 1.4 के पी/ई और 0.2 के पी/बी अनुपात पर ट्रेड हो रहा हो, उसका ऋण-इक्विटी अनुपात 0.7 हो और सालाना लाभांश यील्ड 17.7% हो तो किसी भी निवेशक का मन उसमें धन लगाने को ललचा जाएगा। पर, आईटी कंपनी हेलियोज़ एंड मैथेसन इतना होने के बावजूद न तो जमाकर्ताओं का धन और न कर्मचारियों का वेतन समय से दे पा रही है। इसलिए अंश नहीं, संपूर्ण को देखना ज़रूरी है। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में जो कुछ होता है, वो इंसान करते हैं, कोई भूत-भगवान या ग्रह-नक्षत्र नहीं। अल्गो ट्रेडिंग की प्रोग्रामिंग भी इंसान ही करते हैं। इन इंसानों की संख्या लाखों में हैं। बाज़ार के ग्लोबल हो जाने के बाद इनमें दक्ष लोग भी भरपूर हैं। अगर कोई इन सबकी भावनाएं भांप सके तो वो भावों का सटीक पूर्वानुमान लगा सकता है। लेकिन ऐसा संभव नहीं तो पिछले पैटर्न से काम निकालना पड़ता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में देशी या विदेशी संस्थाओं के अलावा ब्रोकरेज हाउसों और पंटरों का भी खूब खेल चलता है। अक्सर ये लोग प्रवर्तकों से मिलकर तूफान मचाते हैं। लेकिन वे बड़ी कंपनियों में खास कुछ नहीं कर पाते। उनका दायरा मिड, स्मॉल या माइक्रो कैप कंपनियों तक सीमित रहता है। इसलिए अक्सर देखने में आता है कि धंधे में पिटी कंपनियों तक के शेयर उछल जाते हैं। हमें उनसे दूर रहना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग दरअसल एक जंग है जिसमें हम विरोधी का धन निकालकर अपने खाते में खींच लेते हैं। इसलिए यह भलीभांति समझना ज़रूरी है कि हमारे सामने कौन है। यह जानना भी ज़रूरी है कि बाज़ार में असली असर देशी-विदेशी संस्थाओं की हरकतों का पड़ता है। रिटेल ट्रेडर कभी भी बाज़ार की दशादिशा तय नहीं करते। लेकिन हम तो अक्सर अंधेरे में तीर चलाते हैं। लगा तो तीर नहीं तो तुक्का! अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर या किसी भी वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग के पीछे मूल सोच होनी चाहिए न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमाने की जुगत निकालना। इसीलिए आम ट्रेडरों के लिए सिद्धांत यह है कि जिस दिन भी कोई खबर बड़ी आनेवाली हो, डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी का दिन हो, कंपनी के नतीजे आने हों, उस दिन ट्रेडिंग कतई ना करें। कारण, इन दिनों खबरों के अंधड़ में भावों में बड़ी उठापटक होती है। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी