आर्थिक मूल्य शून्य तो बजाओ ताली!
अवसर लागत और आर्थिक मूल्य की धारणा आपस में जुड़ी हुई हैं। ऊपर से लगती हैं आसान, पर अंदर से हैं काफी उलझी हुई। लेकिन अवसरों को पकड़ने-छोड़ने के आज के दौर में इन्हें समझना ज़रूरी है। मसलन, नौकरी करते समय आप का वेतन 50,000 रुपए था। आपने बिजनेस शुरू किया तो महीने में 50,000 रुपए कमाते ही उसका आर्थिक मूल्य ऋणात्मक से शून्य हो जाता है जो सुखद स्थिति है। अब करते हैं शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
पूरी लागत गिननी होती है ट्रेडिंग में
लागत के बिना कोई बिजनेस नहीं होता। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग भी बिजनेस है। कितने पर खरीदा व बेचा, इस पर दोनों तरफ कितना ब्रोकरेज़ दिया और कितना टैक्स देना होगा, यह सारा कुछ जोड़कर पूरी लागत निकलती है। यह भी आंकना पड़ता है जितना समय ट्रेडिंग में लगाया, उतने समय कोई और काम करते तो हम कितना कमाते। यहीं पर अवसर लागत व आर्थिक मूल्य की धारणा काम आती हैं। अब देखते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
ये 52,000 लोग उकसाते हैं ट्रेडिंग को
पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी की अद्यतन सूचना के मुताबिक भारतीय शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में रजिस्टर्ड ब्रोकरों की संख्या 7306 और उनसे जुड़े सब-ब्रोकरों की संख्या 44,540 है। इस तरह करीब 52,000 लोग हैं जो चाहते हैं कि हम ज्यादा से ज्यादा ट्रेड करते रहें ताकि हर सौदे के ब्रोकरेज़ से उनका धंधा बढ़ता रहे। उनका स्वार्थ हमें लाभ कराने में नहीं, बल्कि अपने धंधे को बढ़ाने में है। अब आजमाते हैं बुध की बुद्धि…औरऔर भी
रिटेल को विपरीत सलाह देते हैं ब्रोकर
वित्तीय बाज़ार में कोई भी सौदा, चाहे वो बड़ी संस्था का हो या रिटेल निवेशक का, बिना ब्रोकर के नहीं होता। लेकिन ब्रोकर संस्थाओं के सौदों को ज्यादा ही तवज्जो देते हैं क्योंकि उनसे उन्हें बराबर व बड़ा धंधा मिलता है। इसीलिए वे अक्सर संस्थाओं का सौदा पूरा करने के लिए रिटेल निवेशकों का शिकार करते हैं। संस्थाओं की खरीद पर रिटेल निवेशक/ट्रेडर को बेचने और बिक्री पर खरीदने की सलाह देते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
रिश्ता मुद्रास्फीति, ब्याज व बाज़ार का
आज शाम जून की रिटेल मुद्रास्फीति के आंकड़े आएंगे। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि इसी के आधार पर रिजर्व बैंक ब्याज दर का फैसला करता है। ब्याज दर घटती है तो लोगबाग बैंक में जमा के बजाय अपना धन रियल एस्टेट या शेयर बाज़ार में लगाते हैं ताकि उन्हें ज्यादा रिटर्न मिल सके। इसीलिए ब्याज दर घटने पर अमूमन शेयर बाज़ार बढ़ता है। हालांकि चीन फिलहाल इस नियम का अपवाद है। अब देखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी





