कहां है वो मोड़ जहां से मुड़ते हैं भाव
बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के पैटर्न को पकड़ने से साफ हो जाता है कि भावों का कौन-सा दायरा है जहां वे खरीद सकते हैं या किन भावों पर वे बिकवाली कर सकते हैं। वे कभी घबराहट में सौदे नहीं करते। एक तरह की लयताल उनकी खरीद-फरोख्त में रहती है। वे जहां प्रवेश/निकास करते हैं, वहां से भाव दिशा बदलते हैं तो उनकी दिशा पकड़ने से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
पकड़ें बैंकों-वित्तीय संस्थाओं का पैटर्न
निवेशक तो कंपनी के बिजनेस व संभावनाओं के आकलन से लंबे सौदे पकड़ सकते हैं मगर ट्रेडरों को टेक्निकल एनालिसिस का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन जो हो चुका है, उससे आगे जो होगा, इसका सटीक अनुमान कैसे लगाया जा सकता है? यह मुश्किल तब आसान होने लगती है जब हम बाज़ार में सक्रिय बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के पैटर्न को समझना सीख जाते हैं। चार्ट पर देखें तो यह दिखने लगता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
दिहाड़ी नहीं, ज्यादा कमाने की सोचिए
ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती। इसी तरह शायद इंट्रा-डे ट्रेडरों की बरक्कत नहीं होती। बेचारे सुबह से शाम तक मेहनत करते हैं। लेकिन बमुश्किल इतनी दिहाड़ी कमा पाते हैं कि किसी तरह चाय-पानी और आने-जाने का खर्चा निकल जाए। शेयर बाज़ार में कमाते हैं वही जो कई दिनों, महीनों या सालों के सौदे करते हैं। इसमें भी वे जो भावी आकलन में ज्यादा माहिर होते हैं। इस महारत का क्या है सूत्र? फिलहाल सोमवार का व्योम…औरऔर भी
अपने पर भरोसा नहीं तो जीत नहीं
मां कहती थी कि वो लोग किसी काम के नहीं होते जो खुद पर भरोसा नहीं करते, खुद की इज्ज़त नहीं करते। मां मुझे ऐसे लोगों से दूर रहने की सलाह दिया करती थी जो खुद को कोसते हैं। वो कहती थी कि दुनिया को जीतना उतना मुश्किल नहीं होता, जितना खुद को जीतना। “लेकिन मां! खुद को जीतने का क्या अर्थ होता है?” “खुद को जीतना यानी अपने पर भरोसा करना। खुद को जीतना यानी अपनीऔरऔर भी
भाव हों सही, तभी पकड़ें कंपनी
अभी दुनिया की जो आर्थिक हालत है, चीन तक की स्थिति डांवाडोल है, उसे देखते हुए क्या भारत में अब भी दीर्घकालिक निवेशकों के लिए कोई संभावना बची है? यह विषय निबंध के लिए अच्छा है। लेकिन हम जैसे आम निवेशकों के लिए इसका कोई मायने-मतलब नहीं। इसे संस्थाओं की मगजमारी के लिए छोड़ देना चाहिए। हमें तो अच्छी कंपनी को सही भाव पर पकड़ने की कोशिश में लगे रहना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी






