पैसे गंवाने में कोई मेहनत नहीं लगती, बनाने में लगती है। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग तो कुछ ज्यादा ही कठिन है। कारण, इसके लिए हमें अपना पूरा माइंटसेट बदलना पड़ता है जो अपने-आप में बेहद मुश्किल काम है। घाटे से हर कोई भागता है। लेकिन ट्रेडिंग करनी है तो दिमाग में बैठाना पड़ेगा कि यहां घाटे से कोई नहीं बच सकता। घाटा इस बिजनेस की लागत है जिसे न्यूनतम रखना सीखना पड़ता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

टीसीएस में उम्मीद से बेहतर नतीजों की घोषणा के बाद इशारा मिल गया था कि इन्फोसिस के भी नतीजे बेहतर हो सकते हैं। इसी अनुमान के साथ हमने 16 जुलाई को आकलन किया कि इन्फोसिस 985 से 21 जुलाई को नतीजे आने तक 1080 रुपए तक पहुंच सकता है। और, नतीजों के दिन वो 11.5% उछलकर 1116.35 रुपए पर जा पहुंचा। यह है सोचे-समझे रिस्क और उस पर मिलनेवाले रिवॉर्ड का रिश्ता। अब चलाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

हमें शेयरों में 2-4% उतार-चढ़ाव पर ट्रेडिंग का काम इंट्रा-डे ट्रेडरों पर छोड़ देना चाहिए और खुद 8-10% लाभ देनेवाले कई दिनों के स्विंग ट्रेड पर फोकस करना चाहिए। हमेशा छह महीने से दो साल के लंबे ट्रेन्ड की दिशा में ट्रेड करें। जिनमें गिरने का ट्रेन्ड मजबूत हो, उन्हें पिछली बढ़त तक पहुंचने पर शॉर्ट करें और बढ़ने के मजबूत ट्रेन्ड वाले स्टॉक्स को पिछली गिरावट के करीब पहुंचने पर खरीद लें। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

समाज में शोर है, मीडिया में शोर है, बाज़ार में शोर है, चार्ट पर शोर है। इस कोलाहल में भटकते रहे तो सच तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे। सच पर पहुंचने की ज़िम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ अपनी है क्योंकि ट्रेडिंग में दूसरे की नहीं, अपनी पूंजी लगी है। बहुत सारे इंडीकेटरों में फंसे तो शोरगुल में गुम हो जाएंगे। इसीलिए अधिकतम चार इंडीकेटर चुनिए, उनकी बैक-टेस्टिंग कीजिए, भविष्य पर लागू कीजिए, ट्रेड कीजिए। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

निवेश में सफलता के लिए धैर्य से कहीं ज्यादा ज़रूरी है जिस कंपनी में आप निवेश कर रहे हैं, उसकी समझ। अक्सर हम ब्रोकर या किसी जान-पहचान वाले के कहने पर शेयर खरीद लेते हैं। इतना भर देखते हैं कि वो ज्यादा महंगा तो नहीं। आगे होता यह है कि हम साल-दर-साल इंतज़ार किए जाते हैं। लेकिन वो शेयर गिरते-गिरते रसातल तक पहुंच जाता है, बढ़ने का नाम ही नहीं लेता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी