ट्रेडिंग में उतरे हैं तो जाहिरा तौर पर मकसद औसत नहीं, बल्कि उससे ज्यादा रिटर्न कमाना होगा। इसके लिए आपको औसत से बेहतर ट्रेडर होना पड़ेगा, जिसके लिए आपकी सोच उन सभी से बेहतर होनी चाहिए। आज तो हर ट्रेडर के पास कंप्यूटर है, इंटरनेट से मिल सकनेवाली सारी सूचनाएं हैं। बहुतों के पास संभव है कि आपसे बेहतर सॉफ्टवेयर हो। फिर कौन-सी चीज़ है जिसमें आप उन पर भारी पड़ सकते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है और यह कोई नई बात नहीं क्योंकि लालच व डर की दो अतियों के बीच झूलना उसका मूल स्वभाव है। लेकिन इसके साथ ही हर ट्रेडर के अंदर अलग किस्म का भावनात्मक संघर्ष चलता रहता है। अगर वो उसमें विजय नहीं हासिल कर पाता तो तुक्का भले लग जाए, लेकिन बराबर सफल नहीं हो सकता। इसलिए बाज़ार में जीतने से पहले उसे खुद को जीतना पड़ता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार इस साल मार्च के बाद से लगभग 15% गिर चुका है तो बिजनेस चैनलों व अखबारों में विश्लेषक बताने लगे हैं कि अब ब्लूचिप कंपनियों को खरीद लेना चाहिए। लेकिन कौन-सी ब्लूचिप? हो सकता है कि गिरी हुई ब्लूचिप सड़ी हुई निकली। जैसे, किसी ज़माने की ब्लूचिप रिलायंस कैपिटल 2008 में 79% गिरने के बाद 36% और गिर चुकी है। तब 92% गिरा यूनिटेक 85% और गिर चुका है। आज पेश है एक सॉलिड ब्लूचिप…औरऔर भी

हम में से हर कोई ऐसे बैक्टीरिया का झुंड या बादल लिए चलता है जो आपस में इतना अलग है कि उंगलियों के निशान या पुतलियों की बनावट की तरह हमारी पहचान का माध्यम बन सकता है। यह बात अमेरिका के ओरेगॉन विश्वविद्यालय की एक रिसर्च रिपोर्ट से सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुख्य लेखक जेम्स मीडो का कहना है, “हमें उम्मीद थी कि हमें किसी व्यक्ति के आसपास धूल और उसके शरीर व कपड़ों सेऔरऔर भी

शेयरों के भाव का चार्ट बीएसई या एनएसई की साइट पर मुफ्त उपलब्ध हैं। दैनिक भावों के चार्ट पर आखिरी बिंदु से पीछे वहां तक जाएं, जहां से भाव ठीक पिछली बार उठने लगे थे। वहां आखिरी कैंडल का दायरा देखें। उससे संस्थाओं की मांग का ज़ोन पता लगेगा। इसी तरह ठीक जहां से भाव गिरे थे, वहां की कैंडल उनकी बिकवाली का ज़ोन बताती है। इस मोटे सूत्र में बहुतेरी बारीकियां हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी