यहां कमाई में देशी विदेशियों पर भारी
मूल्य खोज का अंतिम फायदा कंपनियों को होता है। इसलिए वे चाहती हैं कि शेयर बाज़ार में सक्रियता बनी रहे। वे मीडिया पर विज्ञापन से लेकर स्टॉक एक्सचेंजों को लिस्टिंग फीस वगैरह देती हैं। बाज़ार में रोज़ाना के खेल में एक का नफा, दूसरे का नुकसान होता है। अपने यहां विदेशियों से उलट चलती हैं देशी संस्थाएं। इसके दम पर एलआईसी ने 2014-15 में बाज़ार से 24,373 करोड़ रुपए का मुनाफा बटोरा है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
इस खोज में कमाए कौन, गंवाए कौन
बात बराबर है कि बाज़ार, प्राइस डिस्कवरी या मूल्य खोज का माध्यम है। पर इस खोज को कितने झंझावात और कैसे-कैसे प्रभावों से गुजरना होता है, यह पिछले हफ्ते ने खुलकर बता गिया। सोमवार को चीन से असर से बाज़ार इतना गिरा कि लोगो को 1987 के काले सोमवार की याद आ गई। यह बाज़ार की कड़वी हकीकत है। लेकिन यह भी सोचिए कि इसमें कमाता कौन और गंवाता कौन है? अब पकड़ते हैं सोमवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
तबीयत खराब है, आज तथास्तु नहीं
मित्रों, पिछले पांच सालों से ज्यादा वक्त में कभी ऐसा नहीं हुआ कि यह कॉलम किसी दिन न आया हो। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने या तबीयत थोड़ा खराब होने पर भी इसे लिखता रहा। लेकिन आज यह कॉलम नहीं आ रहा है। कारण, पिछले मंगलवार से चढ़ा बुखार लगातार इस कदर बढ़ता गया है कि अभी रिसर्च तो छोड़िए, बैठकर दो-चार पैरा लिखने तक की स्थिति नहीं है। लेकिन आप लोग कतई चिंता न करें।औरऔर भी
एक कदम वर्तमान तो एक भविष्य में
वैज्ञानिक शोध से निकला सत्य है कि भूकम्प का आभास धरती में बिल बनाकर रहनेवाले नेवले जैसे जानवरों को कुछ हफ्ते पहले ही हो जाता है। इंसान के सामूहिक दिमाग के रूप में काम करनेवाला बाज़ार भी आगे की घटनाओं पर काफी पहले ही अपनी प्रतिक्रिया जता देता है। उसका एक कदम वर्तमान और एक-आधा कदम भविष्य में होता है। बाज़ार से मुनाफा कमाना है तो हमें भी इस भाव को साधना होगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी






