15% चक्रवृद्धि, 5 साल में दोगुना
निवेश में ज्यादा हायतौबा नहीं मचानी चाहिए। साल भर में 15-20% रिटर्न काफी है। इससे ज्यादा मिल जाए तो अच्छा। लेकिन शुरू में ही निवेश को कई गुना करने का लालच न पालें। अन्यथा शातिर खिलाड़ी इसका फायदा उठा आपकी जेब चट कर जाएंगे। चक्रवृद्धि की ताकत समझिए। 15% सालाना की चक्रवृद्धि की दर से बढ़े तो धन पांच साल में दोगुना हो जाता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी जिसका शेयर लुढ़का पड़ा है।…और भीऔर भी
मन को थोपने से धुंधला जाती तस्वीर
बाज़ार में सक्रिय असरदार खिलाड़ियों की चाल को हमें वस्तुगत तरीके से समझना होता है। उनके नाम भले ही जाहिर न हों, लेकिन उनके सौदे बाज़ार बंद होते ही भावों के चार्ट पर अपनी निशानदेही छोड़ जाते हैं। बाज़ार की यही खासियत है। वहां बहुत कुछ छिपा नहीं रहता। लेकिन दिक्कत यह है कि हम समझने में शॉर्टकट अपनाते हैं और अक्सर अपने मन की बातें चार्ट पर थोप देते हैं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
डॉलर में दम, पर अमेरिकी औकात कम
विश्व के जीडीपी में अमेरिका का योगदान 23% और वस्तु व्यापार में 12% ही है। फिर भी दुनिया का 60% उत्पादन और लोग उन देशों में हैं जिनकी मुद्रा की सांसें डॉलर में अटकी हुई हैं। अमेरिका ने दुनिया में अपना आधिपत्य 1920 से 1945 के दौरान ब्रिटेन को पीछे धकेलकर बनाया। लेकिन डॉलर की ताकत बनी रहने के बावजूद इधर अमेरिका की आर्थिक औकात कमजोर हो रही है। अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट निवेश में अमेरिकी कंपनियों का हिस्साऔरऔर भी
संभावित चाल को पकड़ना है चुनौती
हर दिन ट्रेडर के सामने यह जानने की चुनौती रहती है कि भाव आज या आगे कहां जा सकते हैं। इसमें पक्का कुछ भी नहीं, प्रायिकता है, कयासबाज़ी है। जाहिर है कि भाव कोई भगवान नहीं, इंसान ही खोलते और चढाते-गिराते हैं। कौन हैं वे खिलाडी जो बाज़ार की दशा-दिशा तय करते हैं? कभी-कभी एचएनआई, अक्सर संस्थाएं। ऐसे में असली सूत्र यह है कि इनकी संभावित चाल को पहले से कैसे भांपा जाए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
रिस्क की तैयारी व ज़िम्मेदारी अपनी
जीवन ही नहीं, बाज़ार में भी कल के बारे में पहले से कुछ भी पक्का नहीं। वहां बहुत कुछ अज्ञात है। इसलिए उससे निपटने की चुनौती है। और, चुनौती से निपटने के लिए रिस्क लेना पड़ता है। इसमें टिप्स नहीं, सही विश्लेषण से मदद मिलती है। लेकिन रिस्क से निपटने की अंतिम तैयारी अपनी होनी चाहिए। ऐसा कतई न करें कि फायदा तो अपना और घाटा तो औरों पर ज़िम्मेदारी डाल दी। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी





