मुफ्त टिप्स की मार होती बड़ी तगड़ी
बहुतेरे लोग ब्रोकरों या बिजनेस चैनलों की ‘मुफ्त’ टिप्स पर भरोसा करते हैं। भूल जाते हैं कि आज के ज़माने में जो चीज़ मुफ्त होती है, उसमें असली माल या उत्पाद आप होते हैं जिसकी संख्या-शक्ति को बेचा जाता है। कुछ लोग तथाकथित विशेषज्ञों की टिप्स के लिए 20-25 हज़ार तक फीस देते हैं। थोड़ा सही, ज्यादा गलत के चक्कर में वहां भी आखिरकार पूंजी डूब जाती है। फिर जाएं तो कहां जाएं? अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
टिप्स लेना 100% घाटे का सौदा क्यों!
बिरले लोग ही होते हैं जो भयंकर रिस्क उठाना चाहते हैं। अन्यथा ज्यादातर निवेशक या ट्रेडर न्य़ूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमाना चाहते हैं। जीवन, स्वास्थ्य या संपत्ति के रिस्क को संभालने के लिए बीमा है। पर, वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग के रिस्क को संभालने के क्या उपाय हैं? एक आम तरीका तो लोग यह अपनाते हैं कि किसी से टिप्स ले ली जाए। लेकिन टिप्स लेना शत-प्रतिशत घाटे सौदा साबित होता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
रिस्क घट सकता है, मिट नहीं सकता
जो पल गुज़र चुका, उसको लेकर बहुत सारी चीजें ऐलानिया कही जा सकती हैं। लेकिन जो पल आनेवाला है, वो अनिश्चितता से घिरा है जिसे मिटाया नहीं जा सकता। बाकायदा कीमत अदा करके उसे नाथा तो जा सकता है और इसी पर सारा बीमा व्यवसाय टिका है। लेकिन अनहोनी के रिस्क को खत्म नहीं किया जा सकता। शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग के रिस्क को भी कभी खत्म नहीं किया जा सकता। अब सोम का व्योम…औरऔर भी
15 से 40 कंपनियों में निवेश काफी
पोर्टफोलियो प्रबंधन का सिद्धांत कहता है कि अगर अगल-अलग तरह की 40 कंपनियों में निवेश किया जाए तो पूरे निवेश में कंपनियों का खास अपना रिस्क मिट जाता है और केवल शेयर बाज़ार का आम रिस्क बचा रह जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आम निवेशकों को एक समय में कितनी कंपनियों में निवेश रखना चाहिए। व्यवहार कहता है कि इनकी संख्या 15 से 40 रहे तो बेहतर है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी






