नारा बुलंद हो रहा वित्तीय आज़ादी का
वित्तीय आज़ादी का नारा ज़ोर पकड़ता जा रहा है। यह तो ठीकठीक नहीं पता कि देश में कितने लोग फिलहाल शेयर, कमोडिटी या फॉरेक्स बाज़ार में ट्रेड करते हैं। लेकिन एक स्पष्ट रुझान दिख रहा है कि 35-50 साल के बीच के तमाम नौकरीपेशा लोग अपनी बचत के साथ वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग के लिए उतरने लगे हैं। उनका मकसद है कि खुद अपना बॉस बनकर वित्तीय आज़ादी हासिल की जाए। अब पकड़ते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
उन्माद उतरा, आगे सच का सामना
इस हफ्ते साल 2015 विदा ले रहा है। लेकिन जाते-जाते अपना बैटन नए साल 2016 के हाथों में थमाता जा रहा है। हफ्ता बीतते-बीतते हम नए साल में पहुंच जाएंगे क्योंकि इसका आखिरी ट्रेडिंग दिन नए साल का पहला ट्रेडिंग दिन है। इस साल 1 जनवरी से 24 दिसंबर तक निफ्टी 5.11% और सेंसेक्स 6.07% गिर चुका है। नई सरकार का उन्माद उतर चुका है। अब बाज़ार का दारोमदार सच पर टिका है। देखें सोमवार का व्योम…औरऔर भी
सही सवाल में छिपा निवेश का मंत्र
शेयर खरीदते वक्त हम अक्सर जांचते-पूछते हैं कि वो आखिर कितना उठ सकता है? मगर, यह सवाल गलत है क्योंकि कोई ठीकठीक नहीं जानता कि वो कहां तक जाएगा। हम भविष्य नहीं जानते। लेकिन हम चाहें तो अतीत की गहरी तहकीकात ज़रूर कर सकते हैं। इसलिए सही सवाल यह है कि क्या वो शेयर पर्याप्त गिर चुका है। लेकिन साथ ही याद रखें कि हर गिरा हुआ शेयर सस्ता नहीं होता। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
कला जो बना सकती ट्रेडर को सोरोस
दुनिया के मशहूर ट्रेडर जॉर्ज सोरोस का कहना है कि हमें उस रुझान को पकड़ना है जिसका आधार झूठा है और उसके खिलाफ दांव लगाना है। यह वही मौका होता है जब रुख पलटनेवाला होता है। रुझान के साथ चलकर बहुत मामूली मुनाफा कमाया जा सकता है और अक्सर तगड़ा झटका लग जाता है। लेकिन झूठे रुझान के खिलाफ सही दांव लगाने की कला आ जाए तो कोई भी सोरोस बन सकता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी






