चौंकाया तो उछलेगा, वरना बिकवाली
अर्थशास्त्रियों से लेकर बाज़ार तक ने तय मान रखा है कि आज 11 बजे रिजर्व बैंक रेपो या ब्याज दर 0.25% घटा कर 6.75% से 6.5% कर देगा। साथ में सीआरआर और एसएलआर थोड़ा कम किया जा सकता है ताकि बैंकों के पास कैश की उपलब्धता बढ़ जाए। रिजर्व बैंक ने इतना किया तो बाज़ार सामान्य रहेगा या बिकवाली आ सकती है। इससे ज्यादा हुआ तो बाज़ार चौंककर उछल सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि से आगे…औरऔर भी
इस सवाल की सोच से बनेंगे शिकार
यह हफ्ता खबरों और उम्मीदों का है। वित्त वर्ष 2016-17 की पहली मौद्रिक नीति मंगलवार को आएगी। पांच राज्यों के चुनाव शुरू हो रहे हैं। इसलिए हम खबरों तक सीमित रहेंगे। लेकिन बड़े से लेकर छोटे शहरों तक आम ट्रेडरों में फैली यह धारणा तोड़नी ज़रूरी है कि कोई दूसरा उन्हें कमाकर दे सकता है। लोगबाग अक्सर पूछते हैं कि इंट्रा-डे में कितना कमाकर दे सकते हो? इस सोच में बुनियादी खोट है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
धैर्य के साथ काट-छांट भी ज़रूरी
कहा जाता है कि अच्छी कंपनी में निवेश करो और दस-बीस साल के लिए भूल जाओ। लेकिन हर पल बदलती दुनिया में इतना ज्यादा धैर्य भी अच्छा नहीं होता। निवेश की खेती में पूरी सावधानी के बावजूद फालतू घास के घुसने का खतरा बना ही रहता है। इसलिए अपने पोर्टफोलियो में बराबर काट-छांट करते रहना चाहिए। साल भर के बाद कमज़ोर या खराब प्रदर्शन करने वालों को बाहर निकाल देना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
सारा खेल यहां कमबख्त प्रायिकता का
अपने दिलो-दिमाग में कहीं गहरे बैठा लीजिए कि वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग सटीकता का नहीं, प्रायिकता का खेल है। यहां कुछ भी 100% पक्का नहीं। हो सकता है कि किसी शेयर में 80% बढ़ने का चांस हो और कहीं मामला 50-50% पर अटका हो। प्रायिकता का हिसाब ही बता सकेगा कि किसमें बिकवाली के आसार 60% या ज्यादा हैं और कौन-सा शेयर कुछ दिन में रपट सकता है। अब वित्त वर्ष 2016-17 के पहले दिन का अभ्यास…औरऔर भी






