भाव चढ़ाता है मार्जिन व मुनाफा
कंपनी अगर अच्छा लाभ मार्जिन कमाए और बराबर अपना प्रति शेयर लाभ बढ़ाने के जतन में लगी रहे तो उसका शेयर थोड़े बहुत दबाव में आने के बावजूद लंबे समय में बढ़ता है। हमें निवेश के लिए कंपनियां चुनते वक्त खास ध्यान रखना चाहिए कि धंधे पर उनकी पकड़ कितनी है, उसका दायरा कितना बड़ा है और अपने माल पर वो कितना ज्यादा प्रीमियम खींच सकती है। आज तथास्तु में ऐसी ही स्थिति में खड़ी एक कंपनी…औरऔर भी
दिसंबर तक निफ्टी होगा 8500 पर!
आर्थिक विकास चल निकला तो शेयर बाज़ार भी चढ़ने लगेगा। जानकारों के बीच माना जा रहा है कि जून तक बीएसई सेंसेक्स 26,135 तक और दिसंबर तक 28,000 पर पहुंच सकता है। इसी दौरान निफ्टी पहले 8000 और फिर साल के अंत में 8500 तक पहुंच सकता है। यह अधिकांश विश्लेषकों व अर्थशास्त्रियों की राय है। पर ध्यान रहे कि ऐसी राय के पीछे खालिस विज्ञान नहीं, बल्कि ढेर सारे पूर्वाग्रह होते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
आशावाद बढ़ने लगा आर्थिक गति का
पूंजी की लागत घटने से देश में औद्योगिक निवेश बढ़ता है। आम लोगों के साथ ही कंपनियों के लिए ऋण लेना थोड़ा सस्ता पड़ता है। इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। इस गति से शेयर बाज़ार को आवेग मिलता है। यही आशावाद अब बढ़ता नज़र आ रहा है। तमाम अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ मानते हैं कि आगे शहरों से लेकर गांवों तक मांग बढ़ सकती है क्योंकि इस बार अच्छे मानसून का अनुमान है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
घटी पूंजी लागत, फायदा कंपनियों को
रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष का आगाज़ बड़े सधे अंदाज़ में किया। बैंक जितने ब्याज पर उससे उधार लेते हैं, उस रेपो दर को 0.25% घटाकर 6.5% कर दिया। वहीं, बैंक उसके पास जमाधन पर जितना ब्याज पाते हैं उस रिवर्स रेपो दर को 0.25% बढ़ाकर 6% कर दिया। उसने मनी मार्केट या कॉल मनी बाज़ार की रेंज 1 से घटाकर 0.5% करने की कोशिश की है। नतीजतन, पूंजी की लागत घटेगी। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी






