पैसे से पैसा वही बनाते हैं जो दूसरों के इस लालच का फायदा उठाते हैं। वरना, पैसे से पैसा कभी नहीं बनता। शेयर बाज़ार में निवेश उन्हीं के लिए हैं जो इतना कमाते हैं कि ज़रूरी बचत के बाद भी इतना धन बच जाता है जिसकी उन्हें तत्काल ज़रूरत नहीं होती। वो धन वे मजबूत कंपनियों में लगाते हैं जिनका धंधा बढ़ने पर उनका निवेश फलता-फूलता है। यही मूल सिद्धांत है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

भविष्य में वही ट्रेडर बाज़ार में टिक पाएगा जो उपलब्ध डेटा के गहन विश्लेषण को इंसान की सहज बुद्धि व आर्थिक समझ से मिलाकर अपने सौदे तय कर सकेगा। डेटा जुटाना और उसका हर कोण से विश्लेषण करना उसकी उंगलियों के पोरों का खेल होना चाहिए। यह काम वो कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर की मदद से कर लेगा। फिर उसमें जब वो इंसानी बुद्धि का तड़का लगाएगा तब समय उसका पूरा साथ देगा। अब करें शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार में पहले तिकड़म बहुत चलता था। हर्षद मेहता से लेकर केतन पारेख तक कंपनियों के मालिकों व बैंकों की मिलीभगत से शेयर को 5 से 500 तक पहुंचाकर खेल करते थे। लेकिन अब यह धंधा हाशिए पर चला गया है। कोई इनसाइडर ट्रेडिंग से जेल जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। फिर, कंपनी के लोगों को नतीजों के आसपास कुछ दिनों तक ट्रेडिंग से रोक दिया जाता है। ये अनिवार्य नियम है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

आखिर ट्रेडिंग का भावी स्वरूप क्या होने जा रहा है? पहले सामान्य मूविंग एवरेज़ तक के लिए कैल्कुलेटर लेकर लंबा हिसाब-किताब लगाना पड़ता है। अब बंद भाव ही नहीं, उनके लॉग का चार्ट सेकेंडों में बन जाता है वो भी मुफ्त में। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की गणनाएं आम प्रचलन में आ गई हैं। अगर आज ट्रेडर को बाज़ार में टिकना है तो उसे कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल में माहिर होना पड़ेगा। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बिजनेस में टिके रहने के लिए समय के साथ चलना ज़रूरी है। जो समय के साथ नहीं चलते, वे मिट जाते हैं। डायनोसोर जैसे भीमकाय जानवर तक बदलते वक्त के साथ न चल पाने के कारण धरती से विलुप्त हो गए। इसी तरह ट्रेडिंग के तौर-तरीके फटाफट बदल रहे हैं। अगर आप कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग के बावजूद ऑनलाइन ट्रेडिंग नहीं करते, बल्कि ब्रोकर पर निर्भर हैं तो सरासर गलत हैं। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी