हम नेता बडा सोच-समझकर चुनते हैं। लेकिन दो-ढाई साल में पता चलता है कि वो पूरा हवाबाज़ है तो हम कुछ नहीं कर पाते। कंपनियां भी हम बहुत सोच-समझकर चुनते हैं। पर उन्हें चलाना हमारे नहीं, बल्कि उसके प्रबंधन पर निर्भर करता है। वो गलत निकल गया तो हमारी उम्मीदें टूट जाती हैं। मगर, नेता और कंपनी में फर्क यह है कि कंपनी से हम बीच में ही निकल सकते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

पक्का है कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाज़ार से कमाते ही होंगे। लेकिन कितना? इसका अंदाज़ नहीं है। लेकिन उन्होंने बीते वित्त वर्ष में अपने शेयर बाज़ार से 14,172 करोड़ रुपए निकाले हैं। शायद सूचकांकों के गिरने की बड़ी वजह भी यही है। 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद पहली बार उन्होंने इस तरह की शुद्ध निकासी की है। वैसे नए वित्त वर्ष के पहले महीने में उनकी खरीद चालू है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

एलआईसी ने बीते वित्त वर्ष में शेयर बाज़ार में 65,000 करोड़ रुपए लगाए, जिस पर उसने 11,000 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। यह 16.92% का रिटर्न बनता है। इससे दो सबक सीखे जा सकते हैं। एक यह कि सेंसेक्स 10.33% गिरने के बावजूद बाज़ार से कमाया जा सकता है। दो, इतनी बड़ी रकम और कौशल के बावजूद वित्तीय संस्था भी 17% मुनाफा कमा पाती है। इसलिए 15-20% मुनाफे का लक्ष्य रखना सही है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

चाहे शेयर हो, कमोडिटी हो या फॉरेक्स बाज़ार। सब जगह एक ही हाल है। प्रोफेशनल ट्रेडर, बैंक, वित्तीय संस्थाएं व ब्रोकरेज़ हाउस वहां से कमाते हैं। बाज़ार गिर जाए, तब भी कमाते हैं। वहीं 99% रिटेल ट्रेडर बाज़ार बढ़ने के बावजूद गंवाते हैं। बीते वित्त वर्ष 2015-16 में सेंसेक्स 10.33% गिरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी ने शेयर बाजार से कितना कमाया है? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी