शेयर बाज़ार में संजीदा निवेशकों की कई अलग श्रेणियां हैं। वे बाज़ार में अलग वक्त पर घुसते और निकलते हैं। सबसे पहले कंपनी का दमखम जानने के बाद स्मार्ट व प्रोफेशनल निवेशक एंट्री लेते हैं। उसके बाद सिस्टम ट्रेडर व संस्थाएं। फिर आते हैं प्रोफेशनल ट्रेडर और तब घुसते हैं म्यूचुअल फंड। इनका बटोरना खत्म हो जाने के बाद टीवी व अखबारों में शोर मचता है। तब जाकर रिटेल निवेशक जगते हैं। अब करें शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

आदर्श बाज़ार जैसा कुछ नहीं। वो महज एक परिकल्पना है। निहित स्वार्थ बाज़ार को अपने हिसाब से नचाते हैं। इसलिए देश ही नहीं, विदेश तक में बराबर घोटाले सामने आते रहते हैं। लेकिन पकड़े जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी होती है। अपने यहां भी शेयर बाज़ार में सही शक्तियों के साथ ही ऑपरेटर भी खूब खेल करते हैं। बहुत सारे स्टॉक्स ऑपरेटरों द्वारा चलाए जाते हैं। हमें ऐसे स्टॉक्स से बचना चाहिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमारे-आप जैसे अधिकांश लोगों के मन में यह धारणा भरी हुई है कि शेयर बाज़ार ऐसा बाज़ार है जहां आप मुनाफा खरीद सकते हैं। थोड़ी-सी पूंजी लेकर जाइए और चंद दिनों या महीनों में उसे कई गुना कर लीजिए। मगर, यह धारणा जब ज़मीनी हकीकत से टकराती है तब कपड़े क्या, लंगोटी तक उतर जाती है। याद रखें, इस जहान में कोई ऐसा बाज़ार नहीं, जहां मुनाफा खरीदा जा सकता हो। अब लगाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार आम बाज़ारों जैसे नहीं हैं कि आप गए, दो-चार जगह मोलतोल किया और माल खरीद लिया। यहां आप खरीदार भी हैं और विक्रेता भी। दूसरे, यहां थोक व रिटेल बाज़ार अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ चलते हैं। यहां पुराने देशी खुर्राट ही नहीं, विदेश की दक्ष संस्थाएं भी जमकर काम करती हैं। किसी को भी अगर वित्तीय बाज़ार से कमाना है तो इसकी अन्य बारीकियों को बड़े कायदे से समझना होगा। अब सोम का व्योम…औरऔर भी