पीछे भागने से नोट कभी न आए हाथ
यह नियम मन में कहीं गहरे बैठा लीजिए कि वित्तीय बाज़ार में जिन ट्रेडरों का ध्यान केवल नोट कमाने पर रहता है, वे अक्सर नोट लुटाते और अपना लक्ष्य कभी हासिल नहीं कर पाते। वहीं ट्रेडिंग की राह की बारूदी सुरंगों का बराबर ध्यान रखनेवाले ट्रेडर अक्सर नोट बनाते और अपना लक्ष्य पा लेते हैं। वैसे, बाज़ार को दोनों ही तरह के ट्रेडर चाहिए क्योंकि एक गंवाएगा, तभी तो दूसरा कमाएगा। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
ट्रेडिंग में नोट तक बिछीं बारूदी सुरंगें
जब हम वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग की तरफ लपकते हैं तो बस इतना दिखता है कि वहां धन ही धन है। न बॉस, न ऑफिस जाने का झंझट। कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफोन चालू करो। बाज़ार देखो। सौदे करो और नोट बनाते जाओ। हम यह नहीं देख पाते कि नोट तक पहुंचने की राह में कितनी बारूदी सुरंगें बिछी हुई हैं जो हमारे बैंक खाते से लेकर आत्मविश्वास तक के परखच्चे उड़ा सकती हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
कंपनी का स्वभाव, स्टॉक का कैरेक्टर
कंपनी जिस उद्योग या सेवा में सक्रिय है, उससे उसका स्वभाव तय होता है। जैसे मेटल, दवा, मीडिया, सीमेंट या एफएमसीजी कंपनियों की तुलना अपने उद्योग के भीतर की जा सकती है। लेकिन एक ही उद्योग के स्टॉक्स का चरित्र भिन्न हो सकता है। ट्रेडिंग के लिए हमें स्टॉक के खास चरित्र को समझना होता है जो इस बात से तय होता है कि उसमें किस तरह के निवेशक/ट्रेडर सक्रिय हैं। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
रिज़र्व बड़ा, बोले कम, काम ज्यादा, अधूरा काम उसे जो करना है पूरा
फिराक़ गोरखपुरी की महशूर लाइनें हैं – अब अक्सर चुप-चुप से रहे है, यूं ही कभू लब खोले है; पहले फिराक़ को देखा होता, अब तो बहुत कम बोले है। भारतीय रिजर्व बैंक से रघुराम राजन के जाने के बाद कुछ ऐसी ही कमी कम से कम कुछ महीनों तक तो सालती ही रहेगी। इसलिए नहीं कि वे बिना लाग-लपेट बेधड़क अपनी बात रख देते थे, बल्कि इसलिए कि आज के नौकरशाही तंत्र में उनकी जैसी बौद्धिकऔरऔर भी
सही या गलत नहीं, मतलब कमाने से
रिटेल ट्रेडर शेयर बाज़ार में आते-जाते रहते हैं। लेकिन देशी, विदेश निवेशक संस्थाएं बाज़ार में बराबर टिकी हुई हैं। रिट्रेल ट्रेडर हमेशा चाहता है कि बाज़ार बढ़े तो वो खरीदे और गिरे तो वो बेचे। लेकिन गौर करें तो हर दिन देशी और विदेशी संस्थाएं अमूमन एक-दूसरे से उल्टा रुख अपनाती हैं। विदेशी खरीदते हैं तो देशी बेचते हैं या इसका उल्टा होता है। दोनों ही सही हैं क्योंकि दोनों ही कमाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी





