फिराक़ गोरखपुरी की महशूर लाइनें हैं – अब अक्सर चुप-चुप से रहे है, यूं ही कभू लब खोले है; पहले फिराक़ को देखा होता, अब तो बहुत कम बोले है। भारतीय रिजर्व बैंक से रघुराम राजन के जाने के बाद कुछ ऐसी ही कमी कम से कम कुछ महीनों तक तो सालती ही रहेगी। इसलिए नहीं कि वे बिना लाग-लपेट बेधड़क अपनी बात रख देते थे, बल्कि इसलिए कि आज के नौकरशाही तंत्र में उनकी जैसी बौद्धिकऔरऔर भी

रिटेल ट्रेडर शेयर बाज़ार में आते-जाते रहते हैं। लेकिन देशी, विदेश निवेशक संस्थाएं बाज़ार में बराबर टिकी हुई हैं। रिट्रेल ट्रेडर हमेशा चाहता है कि बाज़ार बढ़े तो वो खरीदे और गिरे तो वो बेचे। लेकिन गौर करें तो हर दिन देशी और विदेशी संस्थाएं अमूमन एक-दूसरे से उल्टा रुख अपनाती हैं। विदेशी खरीदते हैं तो देशी बेचते हैं या इसका उल्टा होता है। दोनों ही सही हैं क्योंकि दोनों ही कमाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

देश की आबादी अभी 132.68 करोड़ है, जबकि शेयर बाज़ार में पंजीकृत निवेशकों की संख्या 3.19 करोड़ है। यानी, 2.4% भारतीय ही शेयरों में निवेश करते हैं। शहरों के गली-मोहल्लों में जिस तरह गरीब से गरीब लोग लॉटरी खेलते दिखते हैं, उससे लगता है कि लॉटरी खेलने वालों की संख्या दस करोड़ तो होगी ही। ध्यान दें कि लॉटरी भविष्य से खिलवाड़ है, जबकि शेयरों में हम भविष्य से खेलते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

स्ट्राइक रेट के बजाय हमें रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात को तवज्जो देनी चाहिए। मान लीजिए कि कोई ट्रेडिंग सेवा 3:1 का रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात लेकर चलती है, यानी वो ऐसे स्टॉक्स चुनती है जो बढ़े तो 6% बढ़ सकते हैं और गिरे तो 2% पर निकल जाना होगा। दस में से ऐसे छह सौदे गलत निकले तो घाटा 12% होगा, जबकि बाकी चार सही सौदे 24% देकर जाएंगे। यानी, 40% स्ट्राइक रेट पर भी 12% फायदा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जब भी हम ट्रेडिंग की कोई सेवा लेते हैं तो पहला सवाल यही पूछते हैं कि उसके सही होने की दर या स्ट्राइक रेट क्या है। लेकिन किसी समझदार ट्रेडर के लिए यह सवाल एकदम बेमानी है। दरअसल, यह ब्रोकरेज फर्मों के एनालिस्टों का मानदंड है क्योंकि इससे वे अपने को तीसमार-खां साबित करते हैं। इसके लिए वे घाटेवाले ट्रेड को लंबा खींचते और मुनाफेवाले ट्रेड को बीच में ही काट देते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी