शेयर बाज़ार सबसे ज्यादा रिस्की ज़ोन
शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में उतरे हैं तो बार-बार खुद को चुटकी काटकर याद दिलाते रहना चाहिए कि हम धन के सबसे रिस्की ज़ोन में प्रवेश कर रहे हैं। घटनाएं बारम्बार हमें इस बात का अहसास कराती रहती हैं। लेकिन हम आसानी से उनके सबक भूल जाया करते हैं। किसको याद है कि 2009 में यूपीए सरकार की जीत के बाद भारतीय शेयर बाज़ार एक ही दिन में 17 प्रतिशत चढ़ गया था। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
सिर पर टंगी तलवार अनिश्चितता की
शेयर बाज़ार समेत समूचे वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में कोई हारता है, तभी कोई जीतता है। कुछ लोगों का धन निकलकर दूसरों के पास जाता है। एक का नुकसान, दूसरे का फायदा होता है। हमें कोशिश यही करनी होती है कि हम हारने या गंवानेवाले खेमे में न रहे। लेकिन जब आकस्मिकताओं या बाज़ार के अपने स्वभाव के चलते भयंकर गिरावट का आलम हो, तब हमें क्या करना चाहिए? जबाव बेहद आसान है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
बाज़ार सतह पर, अंतर्धाराएं हैं नीचे
दो महीने पहले 7 सितंबर को 52 हफ्तों का शिखर छूनेवाला निफ्टी अब तक 7.5% गिर चुका है। संभव है कि दिसंबर में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से यह और गिर जाए। लेकिन इसी दौरान मजबूत शेयर कुलाचें मार रहे हैं। हम आज तथास्तु में जो कंपनी उठा रहे हैं, उसका शेयर जून में 60 के आसपास था। अभी 300 रुपए के करीब है। बाज़ार में सतह के नीचे की इन अंतर्धाराओं को पकड़ना ज़रूरी है।औरऔर भी
गिरते बाज़ार में कमाते हैं बड़े ही ट्रेडर
आप सामान्य ट्रेडर हैं, आपके पास पांच लाख रुपए से कम पूंजी है तो शेयर बाज़ार में शॉर्ट सौदों से परहेज़ करें। सुनने में बड़ा अच्छा लगता है कि कुशल ट्रेडर बाज़ार में उठने या गिरने, दोनों ही सूरत में कमाता है। लेकिन गिरने पर कमाना बड़ी पूंजीवालों के लिए ही संभव है। एक तो ऐसे सौदे डेरिवेटिव सेगमेंट में ही संभव हैं। दूसरे इंट्रा-डे में की जानेवाली मार्जिन ट्रेडिंग बहुत रिस्की है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी






