सालों लगते हैं भावनाओं को बांधने में
सफल ट्रेडरों पर गौर करें तो उनमें से कोई भी आपको ट्रेडिंग के नुकसान पर किल्लाता हुआ नहीं मिलेगा। ऐसा नहीं कि वे दुनिया से अपनी भावनाएं छिपा ले जाते हैं, बल्कि ट्रेडिंग में घाटे पर उनकी कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया ही नहीं होती। भावनाओं पर नियंत्रण तो बड़े-बड़े योगी तक नहीं कर पाते। फिर आखिर वे कैसे यह कमाल कर लेते हैं। जवाब है – दिनों या महीनों नहीं, सालोंसाल के अभ्यास से। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
तकलीफ ज्यादा, वैसा बिजनेस भाड़ में
अगर आपको भी घाटे के दलदल में धंसने के दुःस्वप्न आते हैं तो शांत होकर सोचिए कि ट्रेडिंग का बिजनेस आपके लिए है या नहीं। इंसान को ऐसा कोई बिजनेस नहीं करना चाहिए जिसमें तकलीफ उसकी उपलब्धि से ज्यादा हो। तकलीफ इतनी है कि आप चैन से सो भी नहीं पा रहे तो ऐसा बिजनेस भाड़ में जाए। वैसे भी तनाव आपको सफल नहीं होने देगा। तब आपको ट्रेडिंग फौरन छोड़ देनी चाहिए। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
बच्चे भूत, ट्रेडर डरें घाटे के दुःस्वप्न से
बच्चों को सोते वक्त भूतों व राक्षसों के डरावने सपने आते हैं। अगर आपको भी ट्रेडिंग में भयंकर घाटा लगने के दुःस्वप्न आते हैं तो इसका मतलब कि आप अभी तक ट्रेडिंग में एकदम कच्चे और बच्चे हो। याद रखें कि आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में घाटे की नहीं, स्टॉप-लॉस को स्वीकार करने की आदत डालनी है। कोई भी बिजनेस बिना लागत के नहीं चलता। स्टॉप-लॉस ट्रेडिंग की लागत है। अब पकड़ते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी
जो बदलने के काबिल, वो कामयाब
इंसान की तरह कंपनी के जीवन में भी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। असली काबिलियत की परख यह है कि आप झंझावातों से कैसे पार पाते हैं। इसी तरह कंपनियों की राह भी बहुत आसान नहीं होती। उन्हें हालात से जूझकर अपनी लाभप्रदता बनाए रखनी पड़ती है। उन्हें इस क्रम में अपने बिजनेस मॉडल में काटछांट करनी पड़ती है। साथ ही अच्छी कंपनी का ध्यान हमेशा अपने शेयरधारकों पर रहता है। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी





