इंसानी फितरत और विकास का सार यही है कि वो बदतर से बदतर सूरत का भी सकारात्मक पक्ष निकाल लेता है। नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था में आधे से ज्यादा योगदान करनेवाले छोटे उद्योगों पर बुरी मार पड़ी है। सेंसेक्स 18 दिन में 6.64% झटक गया है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इससे बहुतेरे मजबूत शेयर नीचे आ गए हैं। हालांकि, वे थोड़ा और गिर जाते तो अच्छा होता। तथास्तु में ऐसी ही एक मजबूत कंपनी…औरऔर भी

हम अपनी सोच सही कर लें तो शेयर बाज़ार हमें कभी निराश नहीं करेगा। यहां न ट्रेडिंग और न ही लंबे निवेश में अधीरता चलती है। सीधी-सी बात है कि भयंकर डर व दुविधा की स्थिति में बाज़ार से दूर रहना चाहिए। चार दिन में बाज़ार खत्म नहीं होने जा रहा। वो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता जाएगा। याद रखें, बाज़ार तभी मूर्खों की तरह बर्ताव करने लगता है जब लोग मूर्खता में सौदे करते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडर बड़े अधीर होते हैं। वे चंद सूचनाओं को जोड़कर फटाफट निर्णय ले लेते हैं, जबकि प्रोफेशनल सारे डेटा पर काफी सोच-समझ और सारी प्रायिकताओं की गणना करने के बाद फैसला लेते हैं। बाज़ार अनिश्चितता से घिरा हो तो वे बाज़ार से दूर रहते हैं। वे किसी पिनक, आदत या झटके के लिए नहीं, नोट कमाने के लिए ट्रेडिंग करते हैं। वहीं, रिटेल ट्रेडरों पर अक्सर ट्रेडिंग का नशा सवार रहता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

हमें अपने सोचने का सहज तरीका बदलना है क्योंकि जो सहज है, उसमें तमाम गांठें व पूर्वाग्रह हैं। उनसे मुक्त होकर हमें हकीकत में जो हो रहा है, उसे जानना, देखना है। पहले यह देखें कि सचमुच क्या हुआ और उसका क्या असर हुआ। फिर यह समझें कि जो हुआ, वैसा क्यों हुआ। हमारे आसपास बहुत सारी अप्रत्याशित चीज़ें घटती रहती हैं। हमें उन्हें देख-समझकर अपनी समझ को अपडेट करते रहना पड़ेगा। अब परखें बुध की बुद्धि…औरऔर भी